जालौन में जनशिकायतों की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कराने की पहल, थाने से लेकर सीओ कार्यालय तक फरियादी की भागदौड़ का भी रहेगा हिसाब

उरई (जालौन)। पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादी को अक्सर यह पता लगाने के लिए कई बार थाने और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। जालौन के पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत इस परेशानी को दूर करने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करा रहे हैं, जिसमें शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके निस्तारण तक की प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी। शिकायत कहां भेजी गई, उसे निस्तारित करने के लिए कितना समय तय हुआ और समय सीमा बीतने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई—इन सवालों का जवाब दर्ज विवरण के आधार पर लिया जा सकेगा।

एसपी की रोजाना होने वाली जनसुनवाई में आने वाले फरियादियों को पावती देने की व्यवस्था की जाएगी। इस पावती में शिकायत से संबंधित जरूरी विवरण के साथ यह भी दर्ज रहेगा कि शिकायत किस थाने को भेजी गई है और उसके निस्तारण के लिए कितनी समय सीमा तय की गई है। यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती और फरियादी दोबारा एसपी के पास पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने का आधार उपलब्ध रहेगा।

इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए एक सॉफ्टवेयर भी विकसित कराया जा रहा है। इसमें प्रत्येक शिकायत और अपराध से संबंधित विवरण संख्या के आधार पर दर्ज किए जाएंगे। शिकायतकर्ता कितनी बार थाने गया, कितनी बार सीओ कार्यालय पहुंचा और उसकी शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसका ब्योरा सॉफ्टवेयर में उपलब्ध रहेगा। संबंधित विवरण पर क्लिक करते ही पूरी जानकारी एसपी के सामने आ सकेगी। सॉफ्टवेयर में फरियादी की फोटो अपलोड करने की सुविधा भी रखी जाएगी, ताकि शिकायतकर्ता की पहचान और उसकी शिकायत से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी आसान हो सके।

एसपी के सीयूजी नंबर पर आने वाली शिकायतों पर भी होगी त्वरित कार्रवाई

जनशिकायतों के निस्तारण के लिए एसपी के सीयूजी नंबर को लेकर भी अलग व्यवस्था की गई है। इस नंबर पर आने वाली कॉल को पीआरओ अटेंड करेंगे। फरियादी से हुई बातचीत रिकॉर्ड की जाएगी और उसकी शिकायत पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की जिम्मेदारी पीआरओ की होगी। जरूरत के मुताबिक संबंधित थाने को कार्रवाई के लिए कहा जाएगा और आवश्यक होने पर पीआरवी को भी मौके पर भेजने के लिए निर्देशित किया जाएगा।

यदि फोन करने वाला कोई विशिष्ट व्यक्ति है और उसे एसपी से सीधे बात करने की जरूरत है, तो पीआरओ उसे एसपी का निजी नंबर उपलब्ध कराने के निर्देशों के तहत काम करेंगे, ताकि वह सीधे संपर्क कर सके।

इस पहल का उद्देश्य केवल शिकायतों को दर्ज करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि फरियादी को अपनी शिकायत की स्थिति जानने के लिए बार-बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पावती, समय सीमा, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल पर त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह इसके क्रियान्वयन और शिकायतों के वास्तविक निस्तारण से स्पष्ट होगा।

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