कुठोंदा (जालौन)।
रबी फसलों की बुवाई शुरू होते ही क्षेत्र में खाद संकट गहराने लगा है। गेहूं और मसूर की बुवाई की तैयारी में जुटे किसानों को डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सरकारी केंद्रों पर ताले लटके हैं। नतीजतन, खाद के लिए दर-दर भटक रहे किसानों को निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां कालाबाजारी और ओवररेटिंग की मार झेलनी पड़ रही है।
निजी दुकानों पर कालाबाजारी, प्रति बोरी 200 से 400 रुपये अधिक वसूली
सरकारी समितियों से आपूर्ति ठप होने का सीधा फायदा निजी खाद विक्रेता उठा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि मांग बढ़ते ही कई निजी दुकानदार निर्धारित दर से 200 से 400 रुपये प्रति बोरी तक अधिक वसूल रहे हैं। बीज, जुताई और डीजल के बढ़ते खर्चों के बीच महंगे दामों पर खाद खरीदने की मजबूरी ने किसानों पर दोहरा आर्थिक बोझ डाल दिया है।
लखनऊ के ईको गार्डन में डटे हैं सचिव, नियमित वेतन की मांग
सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लखनऊ स्थित ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाता है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों की मांग है कि कमीशन व्यवस्था समाप्त कर सरकारी कोष से नियमित वेतन दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक स्थिरता मिल सके।
बुवाई प्रभावित होने की आशंका, प्रशासन से दखल की मांग
किसानों का कहना है कि गेहूं और मसूर की बुवाई के लिए समय पर खाद मिलना अनिवार्य है। यदि जल्द ही खाद की सुचारु आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो बुवाई में देरी होगी जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा। क्षेत्रीय किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि समितियों से वैकल्पिक व्यवस्था कराकर खाद वितरण शुरू कराया जाए और अधिक कीमत वसूलने वाले निजी दुकानदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।







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