कोंच-उरई। समीपस्थ ग्राम लौना में जारी रामलीला में आज बालि वध लीला का शानदार मंचन किया गया। कथा प्रसंग में प्रभु श्रीराम का सीता अन्बेषण करते हुये भीलनी शबरी के आश्रम में पहुंचना और शबरी द्वारा भक्तिभाव से उनका स्वागत करना बाकई त्रेता की अविस्मरणीय घटना है। शबरी भीलनी के जूठे बेर खाकर राम ने सामाजिक समरसता का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया जो आज के समाज के लिये अनुकरणीय है।
युवा कुशवाहा समाज के तत्वाधान में ग्राम लौना में आज बालि वध लीला देखने के लिये सैकड़ों की संख्या में गांव के महिला पुरूष और बश्चे मंचन ग्राउंड में जुटे थे। रामलीला के सभी पात्रों ने बहुत ही जीवंत अभिनय करके लोगों की वाहवाही लूटी। सीता हरण के पश्चात् राम और लक्ष्मण शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं और वहां से आतिथ्य ग्रहण करने के बाद वानरों के राजा सुग्रीव जो अपने अग्रज बालि द्वारा सताया हुआ था, से मित्रता करते हैं और उसका कष्ट दूर करने के लिये बालि का वध कर देते हैं। राम की भूमिका सतवंत ढेरी, लक्ष्मण दीपक पटैरया जालौन, सीता दीपक उर्फ दीपशिखा, व्यासजी प्रेमनारायण काथा, वादक अशोक मस्ताना ताड़ौल, कांगो पर जगदीश पिरौना, नृत्यकार शिवानी इंदरगढ, रजनी ऐरच, काजल ग्वालियर, हेलेन कानपुर, विदूषक वीरपाल हंगामा उरई, हनुमान रावतजी लहार, सुग्रीव रामराजा पटेल कुंवरपुरा आदि रहे। इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि शिवकुमार कुशवाहा ने कहा कि भगवान राम हमें आदर्श जीवन जीने की कला सिखाते हैं। कमेटी के अध्यक्ष उमाशंकर पटेल, कोषाध्यक्ष सुधीर गोस्वामी, जितेन्द्र पटेल, कलू, शिवम मिश्रा, विपिन कुमार, विनय पटेल, विनीत, प्रवीण, कुंदन, रूद्रप्रताप, जगदीश राठौर, राममूरत, वीरेन्द्र, श्याकिशोर आदि मौजूद रहे।







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