0 कोंच-भिंड रेल लाइन में 51 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को देने का है पेंच
04orai11कोंच-उरई। इसे कहते हैं, आसमान से टपके और खजूर में अटके। हालिया संसद में पेश रेल बजट में कोंच-भिंड रेल लाइन स्वीकृत होने की इलाकाई बाशिंदों की खुशी उस वक्त काफूर होती नजर आई जब इस रेल लाइन के निर्माण में राज्य सरकार की हिस्सेदारी का पेंच फंसा दिखाई दिया। बजट प्रस्ताव के मुताबिक जो भी लाइनें स्वीकृत हुई हैं उनमें 51 फीसदी खर्चे की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा वहन करने की तय की गई है। ऐसी स्थिति में बुंदेलखंड की जनपद जालौन को छूती दोनों रेल परियोजनाओं कोंच-भिंड और उरई-महोबा पर असमंजस की तलवार सीधे सीधे लटकती नजर आने लगी है। ये पेंच निकालने का दारोमदार अब सपा नेतृत्व पर आन पड़ा है। कम से कम जिला जालौन, जिला हमीरपुर और जिला महोबा के सपा नेतृत्व के खम की गहराई और उनकी ऊपर तक पहुंच का आकलन करना अब ज्यादा आसान दिखाई देने लगा है।
मौजूदा रेल बजट में बुंदेलखंड पर बरसी प्रभु की कृपा धरती तक आने से पहले ही हवा में विलीन होती दिख रही है। कोंच-भिंड और उरई-महोबा रेल लाइनों की सौगात देकर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जो इनायत इन पिछड़े इलाकों पर की उसमें कंजूसी और पासंग दोनों अब नजर आये हैं जब यहां के लोग खुशियों के गोले दाग कर और मिठाइयां खिला कर इसका इजहार कर चुके हैं। दो दिन पूर्व मंडल रेल प्रबंधक झांसी एसके अग्रवाल ने खुलासा करते हुये बताया है कि इस रेल बजट में मंत्रालय ने फंड देने के तरीके बदल दिये हैं। बजट में उरई-महोबा व भिंड-कोंच नई रेल लाइनों की स्वीकृति अवश्य प्रदान की गई है मगर संबंधित प्रदेश सरकार द्वारा 51 प्रतिशत फंड देने पर ही रेल लाइनों के बिछाने का काम शुरू हो सकेगा। उनके इस खुलासे के बाद जिले के लोग अपने बाल नोंचने की स्थिति में हैं। इन दोनों लाइनों की स्थिति पर अगर गौर करें तो कोंच-भिंड लाइन का एक बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश की सीमा में है और वहां भाजपा की सरकार होने के नाते उनके हिस्से का फंड मिलने की उम्मीद तो की जा सकती है, लेकिन इस लाइन का जो हिस्सा यूपी में पड़ता है वह छोटा भले ही हो लेकिन मौजूदा सूबाई सरकार से उन स्थितियों में लोगों को ज्यादा उम्मीद नहीं है जब चार साल से उखड़े पड़े रोडों के लिये ही धन नहीं मिल सका है। इसके इतर उरई-महोबा की तो पूरी लाइन ही यूपी में पड़ती है सो आसानी से समझा जा सकता है कि यहां के लोग हिन्न की पूंछ से टंग गये हैं। ऐसे में सपा पर ही पूरा दारोमदार आन पड़ा है कि वह राज्य सरकार से उसके हिस्से का फंड इन दोनों लाइनों के लिये दिलवाये।
क्या फिर संकटमोचक बन सकते हैं विधायक वर्मा…?
04orai12कोंच की रेल सेवा बचाने की बात पर खरे उतरने बाले विधायक उरई सदर दयाशंकर वर्मा पर एक बार फिर इस कोंच रेल सेवा विस्तार की जिम्मेदारी आन पड़ी है क्योंकि फिलवक्त कोंच-भिंड लाइन का भावी अस्तित्व संकट में है। वर्ष 1996-97 में जब कोंच-एट शटल बंद हुई थी तब उसे बचाने की लड़ाई इन्हीं विधायक की अगुवाई में लड़ी और जीती गई थी। यानी उस वक्त दयाशंकर वर्मा कोंच रेल सेवा बहाली के लिये संकटमोचक बन कर उभरे थे, उस वक्त कोंच विधानसभा हुआ करती थी और दयाशंकर यहां से पहली बार विधायक बने थे। अब उन्हें एक बार फिर संकटमोचक की भूमिका निभानी होगी क्योंकि इस जिले में वही इकलौते सत्तादल के विधायक हैं। कोंच-भिंड तथा उरई-महोबा रेल लाइनों में राज्य सरकार की 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी का जो पेंच मोदी के रेलमंत्री ने फंसाया है वह निकालना भी स्वाभाविक रूप से उन्हीं की जिम्मेदारी बनती है कि वह लखनऊ की सरकार में इसके लिये जबर्दस्त पैरोकारी करके धन की व्यवस्था करायें।

बिना हाथ ताली बजाने जैसा है रेल मंत्री का प्रस्ताव-विनीता
04orai13जिले से जुड़ी दोनों नई रेल परियोजनाओं में मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जो पेंच फंसाया है वह लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोग राज्य सरकार द्वारा इक्यावन फीसदी फंड देने की शर्त को रेल मंत्री की विफलता करार देते हुये खासे नाराज हैं। पालिका चेयरपर्सन कोंच विनीता सीरौठिया का दो टूक कहना है कि रेल मंत्री बिना हाथ के ताली बजाने की कोशिश कर रहे हैं, यानी लोगों से वाहवाही भी लूटना चाहते हैं और धन की पोटली से कुछ देना भी नहीं चाहते हैं।

रेल केन्द्र की तो पैसा भी केन्द्र दे-देवीदयाल
04orai14प्रदेश सरकार द्वारा इक्यावन फीसदी फंड देने संबंधी पेंच डाल कर केन्द्र सरकार ने यहां के लोगों के साथ छलावा किया है। ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष कहते हैं, यह बात बिल्कुल बेमानी है कि रेल चलवाये केन्द्र, स्वीकृत की है केन्द्र ने और पैसा दे राज्य सरकार। राज्य सरकार जब चार सालों में सड़कें नहीं बनवा सकी है तो उससे रेल लाइन के लिये धन देने की सोचना ही मुगालता पालने जैसा है। ने दो टूक कहा है कि जब रेल केन्द्र की है तो पैसा भी केन्द्र को ही देना चाहिये, अन्यथा तो लोगों के साथ धोखा हुआ है।

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