05orai07उरई। बेदर्द हाकिम हो तो किससे करें फरियाद। कुछ ऐसे ही हालत सूखे की त्रासदी भोग रहे जिले के किसानों की है। जिला प्रशासन की नाक के नीचे रेवा गांव के किसान आज सूखी फसल हाथ में थामें कलेक्ट्रेट में आ धमके। रेवा में डेढ़ महीने से राजकीय नलकूप की मोटर फुकी हुई है। सिचाई न होने से लहलहाती फसल को सूखते देख कलेजा मुंह में आ जाने से किसान हर रोज नलकूप विभाग के गुहार लगा रहे थे लेकिन उनके अधिकारियों को कोई फर्क नही पड़ा। इस कारण आज वे सीधे जिलाधिकारी के पास चले आये।
डीएम के मौजूद न होने की वजह से वे एडीएम आनंद कुमार के कक्ष में घुस गये। उनकी बातें सुनकर एडीएम को भी ताव आ गया। उन्होंने नलकूप विभाग को फोन किया। जिसके बाद सहायक अभियंता मोहन राम को भागे-भागे उनके सामने आना पड़ा। किसानों ने मोहन राम को जमकर खरी खोटी सुनाई। यशवंत सिंह यादव ने बताया कि उनके पास 22 एकड़ जमीन है और लड़की की शादी करनी है। नलकूप विभाग की नालायकी से फसल बर्बाद हो जाने के कारण उनकी आंखों के सामने अंधेरे की स्थिति बन गई है। यही व्यथा एक और किसान बृजकिशोर की थी। एडीएम ने उन्हें तसल्ली दी।
उधर एई ने तलाशा तो पता चला कि जेई साहब तनख्वाय बढ़वाने के लिए किसानों को मरते छोड़ धरना फरमा रहे हैं। डीएम ने किसानों को बचाने के लिए अवर अभियंताओं के कदमों पर अपनी पगड़ी रख दी थी। लेकिन उन्हें पसीजना गंवारा नही हुआ। किसानों ने इसका भी जिक्र किया और कहा कि लगता है कि उनको ही अभियंताओं का इलाज करना पड़ेगा।

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