27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceउरई। एक और चिट फंड कंपनी के निवेश कर्ताओं में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई डूब जाने का अंदेशा घर करने लगा है। मामला एनसीसी दफ्तर के पीछे जीसीए का है। जिसके डिपोजीटरों को अब कंपनी के दफ्तर में खाली कुर्सियों से सिर फोड़कर वापस जाना पड़ रहा है।
जीसीए ने पिछले कुछ वर्षों में जिले में खासी पैठ जमाई थी। हजारों लोगों ने इसमें अपनी रकम आकर्षक ब्याज के प्रलोभन में जमा कराई थी। हालांकि इस कंपनी को पैरा बैंकिंग का लाइसेंस नही मिला है लेकिन अंधे पीसे कुत्ते खायें के माहौल की वजह से किसी जिम्मेदार ने अन्य उद्यमों में साझीदार बनाने की आड़ में जीसीए द्वारा एफडी बनाने मे हस्तक्षेप नही किया। इसी बीच रिजर्व बैंक की सख्ती की वजह से गत् दो वर्षों से जीसीए के कदम भी लड़खड़ा गये। जिन लोगों की एफडी की परिपक्वता अवधि 2014 में थी उनमें से अधिकांश को अभी तक अपना मूलधन भी नही मिल पाया है। ब्याज मिलना तो दूर है।
इसी बीच कंपनी ने स्थानीय मैनेजर अनिल निरंजन के ट्रांसफर की जानकारी प्रसारित करा दी। जिसकी वजह से दफ्तर में निवेश कर्ताओं को तसल्ली देने वाला भी कोई नही बचा। निवेश कर्ताओं का धैर्य इसके चलते टूटने पर आ गया है। बैरंग लौट रहे निवेश कर्ता अब कोई एक्शन लेने की योजना बनाने लगे हैं। नतीजतन किसी भी दिन उक्त कार्यालय में कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा होने की नौबत आ सकती है। अधिकारी इस ओर गौर करें।

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