06orai03उरई। झांसी-ललितपुर-जालौन स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र से विधान परिषद के चुनाव में भाजपा को शर्मनाक पराजय झेलनी पड़ी। पार्टी ने बसपा सरकार में राज्यमंत्री रहे हरीओम उपाध्याय पर हैवीवेट समझकर जोर लगाया था। लेकिन मुकाबले में वे कहीं नही टिके। जेएनयू प्रकरण के कारण गरमाये माहौल का लाभ भी कमजोर कैण्डीडेचर की वजह से पार्टी को नही मिल पाया। पार्टी के अंदरूनी हलकों में अब पछतावा हो रहा है कि इससे बेहतर था कि पार्टी एमएलसी चुनाव में जोर आजमाइश ही न करती। पार्टी के शुभ चिंतक मान रहे है कि इससे एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव का सगुन जिले में पार्टी के लिए बुरी तरह बिगड़ गया है।
झांसी में हुई मतगणना के बाद घोषित परिणामों के मुताबिक सपा की रमा निरंजन को इकतरफा जीत मिली। गैर राजनैतिक बैक ग्राउंड के बावजूद रमा निरंजन की इतनी बड़े अंतर से जीत के पीछे उनकी पार्टी की जड़ें मजबूत होने की दलील तो मानी जा सकती है। लेकिन इसमें उनके व्यक्तिगत प्रभाव का कोई योगदान हो सकता है यह मानना किसी के लिए भी संभव नही है। दूसरी ओर चर्चित चेहरा होने के बावजूद हरीओम की फजीहत का अर्थ यह माना जा रहा है कि जन मानस उन्हें नकारने की मानसिकता बना चुका था। जिससे उसने लो-प्रोफाइल होते हुए भी सीधे मुकाबले में कोई विकल्प न होने की वजह से टूटकर रमा निरंजन को वोट दिया।
उधर भाजपा की भीषण पराजय से पार्टी सांसद भानुप्रताप वर्मा द्वारा चंद महीनों में ही अर्जित की गई अपार लोकप्रियता की कमाई का भी मुजाहिरा हो गया है। सांसद के प्रति उनकी आम लोगों से विमुखता और अकर्मण्यता की झलक जालौन में रेल लाइन के बहाने उनके खिलाफ छिड़े आंदोलन से भी पार्टी को दिख चुकी है। जालौन के लोगों का कहना है कि पहले कभी कस्बे में कोई आंदोलन इतने दिन तक नही चला और न ही किसी मुददे पर लोगों में इतनी सघन एकजुटता देखने को मिली। भाजपा के लोग भी व्यक्तिगत चर्चा में यह मान रहे हैं कि अगर भानु वर्मा जिले में पार्टी का चेहरा बने रहे तो विधान सभा चुनाव में पार्टी को सारी उम्मीदों से हाथ धोना पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि तत्काल पार्टी किसी और वजनदार नेता को जिले में अपना चेहरा बनाकर पेश करने के लिए प्रभावी भूमिका सौंपे।

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