0 मुख्यमंत्री के लाइव टेलीकास्ट का विरोध कर की सरकार विरोधी नारेबाजी
0 कार्यक्रम विभाग पर भी लगाया वसूली करने का आरोप
उरई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को महिला आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ जनपद इकाई ने काला दिवस के रूप में मनाया। प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट में जहां एक ओर महिला दिवस पर मुख्यमंत्री का लाइव टेलीकास्ट दिखाने का प्रोग्राम शुरू हुआ ही था कि महिलाओं ने उसका विरोध करते हुए उसे बंद करने की मांग करते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ ही नारेबाजी शुरू कर दी।
मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जहां पूरे देश व प्रदेश में मनाया जा रहा था। जिसका प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं राज्य महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष जरीना उस्मानी का लाइव टेलीकास्ट दिखाने के लिए वैन पर लगी बड़ी एलसीडी मगवाकर महिलाओं दिखाने की व्यवस्था की गई थी। महिलाओं के बैठने के लिए प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में कुर्सिया भी डलवाई गई थी। जिसमें एक सैकड़ा से अधिक आंगनवाडी सहायिकायें व कार्यकत्रियां भी कार्यक्रम में आमंत्रित की गई थी। लेकिन आंगनवाडी सहायिकायें व कार्यकत्रियों ने लाइव टेलीकास्ट दिखाये जाने का विरोध करते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ काली पटटी बांधकर विरोध करना शुरू कर दिया और जमकर जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं का आरोप था कि केंद्र व प्रदेश सरकार उनके खिलाफ सौतेला व्यवहार कर रही है। बची खुची कसर यहां का प्रशासन उनकों मिलने वाले मानदेय में सुविधा शुल्क लेकर पूरी कर लेता है। संघ की जिलाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने जिला कार्यक्रम विभाग के अधिकारी एवं परियोजना निदेशकों पर आरोप लगाया कि उन्हें जो मानदेय मिलता है उसमें आधा मानदेय विभाग के अधिकारियों की भेंट चढ़ जाता है। केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाले भोजन के रूप में 2500 रुपये प्रति केंद्र का भुगतान प्राप्त होता है। उसमें भी परियोजना निदेशक एवं सुपरवाइजरों द्वारा आधा हिस्सा बटवा लिया जाता है। जिससे वह बच्चों को सही ढंग से मिडड-डे मील योजना का भी लाभ नही दे पाती हैं। महिलाओं द्वारा किये जा रहे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के विरोध करते ही जिला कार्यक्रम विभाग के अधिकारियों ने लाइव टेलीकास्ट चलने के दौरान महिलाओं से हाथ जोड़कर आरजू मिन्नतें की लेकिन वह नहीं मानी और बराबर अपना विरोध प्रशासन को जताती रहीं।
इनसेट-
महिला आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ जनपद इकाई की संयोजक रेशमा खातून ने प्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री को ज्ञापन भेजकर आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिकाओं के साथ किये जा रहे सौतेले व्यवहार पर रोक लगाये जाने की मांग की।
उन्होंने ज्ञापन के माध्यम् से राज्य कर्मचारी घोषित कर मानदेय की जगह वेतन दिये जाने एवं आईसीडीएस योजना के निजीकरण के कदमों को वापस लेने की मांग की। साथ ही न्यूनतम वेतन 15 हजार प्रतिमाह के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा एवं लाभ व राज्य कर्मचारियों की तरह मिलने वाली सुविधाओं की भी मांग की है। ज्ञापन देने वालों में संगीता देवी, आशा देवी, सुशीला, माया देवी, सविता, छाया देवी, प्रीति सिंह, अनीसा खातून आदि महिलाएं उपस्थित रहीं।







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