11orai16कोंच-उरई। परिषदीय स्कूलों में विद्यार्थियों को टाट फट्टी पर बिठा कर पढ़ाने और परीक्षा दिलाने का पुराना रिवाज है। देश को आजाद हुये सात दशक हो गये लेकिन व्यवस्थायें अभी भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई ही अपनाई जा रहीं हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने कुछ स्कूलों को फर्नीचर उपलब्ध कराया था ताकि कुछ तो नया हो और लगे कि हम आजाद हिंदुस्तान में पढाई कर रहे हैं। ऐसा ही एक विद्यालय नदीगांव विकास खंड में है पूर्व माध्यमिक विद्यालय जिसके प्रधानाचार्य रामशंकर छानी जरा क्रांतिकारी विचारों के हैं और बच्चों को अच्छी से अश्छी सुविधायें दिलाने के लिये सरकारी संसाधनों से भी हट कर अपने जेब से कुछ न कुछ अभिनव करते रहते हैं। उनके स्कूल को भी फर्नीचर के नाम पर घटिया क्वालिटी की कुछ मेजें कुर्सियां उपलब्ध कराईं गई थीं जो वक्त से पहले ही दीमकों की भोज्य पदार्थ बन गईं और जर्जर हालत में पहुंच गईं। अब बच्चों की परीक्षा सिर पर आन खड़ी हुई है और फर्नीचर की हालत बेहद खस्ता सो उन्होंने और ग्राम प्रधान जगतसिंह कुशवाहा ने अपनी जेब से पैसे लगा कर फर्नीचर की मरम्मत का कार्य शुरू कराया है ताकि बच्चे उन पर बैठ कर परीक्षा दे सकें।

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