15orai04 15orai03कालपी-उरई। नालों पर अतिक्रमण रोकने की चिंता कागजों मे काफी की जा रही हैं, तांकि बारिश होने पर जल निकासी न हो पाने की वजह से आने वाली बाढ़ के फलस्वरूप संभावित जनधन हानि को रोका जा सके लेकिन हकीकत में अपनी अकर्मण्यता और स्वार्थपरता की वजह से प्रशासन इतना संज्ञा शून्य हो चुका है कि जमीनी स्तर पर ऐसे मामलों में किसी कार्रवाई की तत्परता नही दिखाता है।
उदाहरण राम चबूतरा/निकासा में नाले पर हो रहे अवैध भवन के निर्माण को रोकने में प्रशासन की निरुपायता के तौर पर साफ देखा जा सकता है। यह नाला निकास हाइवे के किनारे होता हुआ फूला देवी मंदिर वाले नाले में गिरता है और इसके बाद पचकुंडा देवी नाले से होता हुआ यमुना नदी में मिल जाता है। लेकिन उक्त भवन के निर्माण के बाद नाले का प्रवाह अवरुद्ध होना तय है और ऐसी हालत में राम चबूतरा प्रथम मोहल्ला जो कि पहले से ही बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है डूब में आ जायेगा। कितने परिवार इससे प्रभावित हो सकते हैं प्रशासन को इसका अंदाजा न हो यह बात नही हो सकती।
उक्त समस्या की गंभीरता को देखते हुए कई सभासदों ने इस मामले में पहल की। जगत सिंह यादव, शशि गुप्ता, शिवशंकर, प्रशांत सिंह सेंगर, गया प्रसाद, सरोज, अरविंद यादव, राजेश द्विवेदी, शिल्पी गुप्ता, कर्मप्रिय गोयल, शबनम इलियास, संतोष कुमार अहिरवार आदि ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित प्रार्थना पत्र उपजिलाधिकारी गोरे लाल शुक्ला को दिया था। जिस पर गोरे लाल शुक्ला ने तुरंत कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। लेकिन अतिक्रमण करने वाले का जो भी दबाव हो इसकी वजह से अवैध रूप से बने भवन को ध्वस्त कराने के नाम पर वह अभी तक कोई कदम नही उठा सके हैं। दूसरी ओर क्षेत्र के वाशिंदों की फ्रिक लगातार बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से उन्होंने जिले के लोकप्रिय जिलाधिकारी का दरवाजा इसमें दखल देने के लिए खटखटाने की योजना बनाना शुरू कर दिया है।

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