02orai10उरई। बाबा साहब अंबेडकर की सवा सौं वीं जयंती के उपलक्ष्य में बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच द्वारा चलाये जा रहे 14 दिवसीय जागरूकता अभियान के दूसरे दिन चुर्खी रोड स्थित बौद्ध बिहार में सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसे संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण के आधार पर दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने की कोशिश कर वंचित तबके के स्वाभिमान को ललकारा जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि अगर इन दुष्टों को सबक सिखाने की बजाय दलितों और पिछड़ों ने इनकी अशोभनीय भाषा को चुपचाप बर्दास्त करना जारी रखा तो यह बाबा साहब और सामाजिक न्याय के अन्य पुरोधाओं के संघर्ष के साथ विश्वासघात होगा। वक्ताओं ने कहा कि दलित और पिछड़े बहुसंख्यक हैं और उन्हें अपने को अपमानित करने वालों को जूते मारते हुए जबाब देने के लिए आगे आना होगा।
कार्यक्रम की शुरूआत कुकरगांव के भंते जी ने दीप प्रज्जवलित कर की। मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि एक ओर हिंदू समाज की एकता का ढोंग किया जा रहा है दूसरी ओर दलित पिछड़ों के उत्थान के प्रयासों की निंदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़े मुटठी भर लोगों का अपमान सहने के लिए नही हैं। उन्हें इसका जबाव देना आता है। सामाजिक उपनिवेश की व्यवस्था न केवल अब बर्दास्त की जायेगी बल्कि अगर अनर्गल हरकतें बंद न हुई तो जिनके पूर्वजों ने यह व्यवस्था चलाई है उनको सजा देने में भी संकोच नही किया जायेगा। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है कि बहुजन समाज को सत्ता और नेतृत्व में पूरा स्थान मिले। विदेशी मानसिकता के लोगों की सामाजिक हुकूमत के दिन अब लद चुके हैं।
इस दौरान नीलिमा, शीलिमा, शिवराम पाल, कालूराम प्रजापति आदि दर्जनों वक्ताओं ने भी विचार प्रकट किये। रविवार को दलित आंदोलन में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका विषय पर परिचर्चा होगी।

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