राहुल सांकृत्यायन की जयन्ती पर विचार गोष्ठी
उरई। राहुल सांकृत्यायन का दर्शन ब्राह्म्ïाणवादी कर्मकांडों की व्यर्थता पर प्रहार करता है तथा मानव की जिज्ञासा को विचारों की अनन्त उड़ान की ओर ले जाता है। भारत में मृतप्राय हो चुके बौद्ध धर्म को पुर्नस्थापित करने का श्रेय राहुल सांकृत्यायन को जाता है। बौद्ध धम्म के बारे में उनकी मान्यता थी कि यही एकमात्र दर्शन है जिसमें मानवीय गरिमा के साथ वास्तविक लोकतंत्र का तत्व निहित है।
उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह ने शनिवार को महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 123वीं जयन्ती पर बसपा विधायक संतराम कुशवाहा के आवास पर भारतीय संस्कृति और राहुल विषय पर आयोजित परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए का.देवेन्द्र शुक्ल ने मौजूदा दौर में सांप्रदायिक फासीवादी सत्ता को मुंहतोड़ जवाब देने के लिये जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और सांस्थानिक हत्या के शिकार हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की वैचारिक एकता के हवाले से वामपंथियों और अम्बेडकरवादियों का कंधे से कंधा मिलाकर सम्वेत लक्ष्य के लिये संघर्ष करने का आह्वान किया।
नाथूराम बौद्ध ने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों का केन्द्र ईश्वर है। एकमात्र बौद्ध धर्म है जिसके केन्द्र में मानव है। जिसका उद्देश्य विश्व मानवता का कल्याण है। उन्होंने हिन्दू शब्द को विधर्मियों द्वारा दी गयी गाली बताया। का.रामेश्वर दयाल बाजपेयी ने कहा कि सन्मार्ग पर चलने के लिये भगवान की जरूरत नहीं होती। राहुल का सबसे बड़ा योगदान दर्शन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन है।
डा.सतीश चन्द्र शर्मा ने कहा कि राहुल ने सनातन धर्म, आर्य समाज, बौद्ध धर्म तथा साम्यवाद तक उन्नति के क्रम में विचारधारा के अग्रसर सोपानों को छुआ लेकिन वह किसी से बंधकर नहीं रह सके। वह सच्चा इन्सान बनना ही जीवन की चरम परिणति मानते थे। का.हरीशंकर ने कहा कि राहुल ने विकास के द्वंद्वात्मक भौतिकवाद को अपने जीवन में उतारा। उनका एकमात्र लक्ष्य शोषित, पीडि़त मनुष्यता की सेवा करना था। हरीशंकर याज्ञिक ने कहा कि विचारों को किसी पर थोपा नहीं जा सकता। डा.रामकिशोर गुप्ता ने वैचारिक परिचर्चा के साथ वामपंथियों और अम्बेडकरवादियों को एकजुट होकर राहुल के विचारों को जन-जन तक ले जाने पर बल दिया। अन्य वक्ताओं में विधायक प्रतिनिधि आरपी कुशवाहा, लाल सिंह चौहान, संतोष कठेरिया, श्रीराम सुमन आदि शामिल थे। गोष्ठी का संचालन इप्टा के महासचिव राज पप्पन ने किया। गोष्ठी में गिरेन्द सिंह कुशवाहा, पूर्व शिक्षक नेता सुन्दरलाल यादव सहित बड़ी संख्या में वामपंथियों और अम्बेडकरवादियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन युवा बसपा नेता राजेश जाटव ने किया।






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