किश्तों में दी जा रही विद्युत
जल संस्थान ने भी किए अपने हाथ खड़े
भीषण गर्मी में जनता हो रही आगबबूूला
उरई। भीषण गर्मी में जहां पानी की दो बूंद आदमी के लिए अमृत बनती है वहीं आठ एमबीए का ट्रांसफार्मर अचानक फुंक जाने के कारण आधे शहर में पानी का संकट गहरा गया और किश्तों में दी जा रही विद्युत की वजह से हजारों की संख्या में जनता आगबबूला हो रही है अगर स्थिति में जल्द ही सुधार न हुआ तो एक उग्र आंदोलन शहर में जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन सकता है।
132 केबीए सब स्टेशन के बगल में 33 केबीए सब स्टेशन स्थापित किया गया है जिससे आधे नगर में विद्युत की आपूर्ति तय की जाती है। कई फीडर इस सब स्टेशन से निकाले गए है। अचानक आठ एमबीए का ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबी के कारण खराब हो गया जिससे अचानक विद्युत की समस्या बढ़ गई। शहर के अधिकांश क्षेत्र ऐसे है जहां अगर बिजली आती है तो पानी ठप हो जाता है और पानी आता है तो बिजली ठप कर दी जाती है। पानी और बिजली एक-दूसरे के विपरीत है। व्यवस्था प्रशासन द्वारा ऐसी नहीं रखी गई है कि जिस क्षेत्र में जितने घंटे भी विद्युत मिले उतनी देर पानी भी प्राप्त हो। ट्यूबवेलों के कनेक्शन किसी फीडर पर डाल दिए गए है और उपभोक्ताओं को किसी फीडर से सप्लाई की जा रही है। जब समस्या पैदा होती है तो किश्तों में विद्युत दे दी जाती है जिससे पानी की किल्लत और विकराल बन जाती है। कुछ लोगों को पानी मिल पाता है बाकी लोग घंटों पानी का इंतजार करते है। इस व्यवस्था से लोगों को निजात नहीं मिल पा रही है जबकि शहर में पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए कई बार दिशा-निर्देश जिला प्रशासन द्वारा दिए जा चुके है परंतु जैसे ही गर्मी का सीजन प्रारंभ होता है कि विद्युत विभाग के ट्रांसफार्मर विस्फोटक होने लगते है। आठ एमबीए का यह ट्रांसफार्मर शायद ही कोई ऐसी गर्मी हो जिसमें वह खराब न हुआ हो। वहीं अभियंता पब्लिक के प्रकोप से बचने के लिए दो-दो घंटे विद्युत की सप्लाई कर रहे है। जेल रोड पर स्थित ट्यूबवेल जहां से विजय नगर हजारीपुरा मातापुरा आदि मोहल्लों की सप्लाई होती है दो घंटे में अधिक चढ़ाई होने के कारण कई मोहल्लों में चढ़ता ही नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में अगर लगातार चार घंटे विद्युत की सप्लाई मिले तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। हालांकि विभागीय उप खंड अधिकारी धर्मवीर का कहना है कि कल रात तक विद्युत की जो भी समस्या है वह समाप्त हो जाएगी और परसों से लोगों को सुचारु रूप से पानी और विद्युत की सप्लाई मिलने लगेगी। ऐसी गर्मी में अड़तालीस घंटे लोगों को पानी न मिलने के कारण उनकी स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। जल संस्थान के पास कोई अन्य वैकल्पिक साधन नहीं है और न ही इमरजेंसी के लिए कोई ऐसा जनरेटर आदि रखा गया है कि पानी की सप्लाई को सुचारु रूप से प्रारंभ किया जा सके। शहर के अंदर जल संस्थान की जितनी भी टंकियां लगी है वह खाली पड़ी रहती है जिनमें शासन का करोड़ों रुपए व्यय हो चुका है और अगर उन टंकियों में पानी का स्टोरेज समय से किया जाए तो विद्युत के अभाव में कम से कम टंकियों के सहारे पानी की सप्लाई मिल सकती है। चूंकि जल संस्थान ने अपने सभी ट्यूबवेलों को सीधा विद्युत लाइनों से जोड़ रखा है और जैसे ही विद्युत प्राप्त होती है पानी की सप्लाई प्रारंभ कर दी जाती है। ऐसी परिस्थितियों में अगर अन्य विकल्प निकट भविष्य में नहीं तलाशे गए तो पानी और विद्युत का संकट पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेगा। फीडर नंबर पांच से लेकर अन्य फीडरों पर भी जो उपभोक्ता विद्युत का उपभोग कर रहे है वह भी इस विद्युत व्यवस्था से तंग आ चुके है जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री चैबीस घंटे विद्युत देने की घोषणा करते रहते है परंतु हकीकत उससे परे है।







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