उरई —समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी टेलीविजन चैनलों पर अपनी पत्नी और बेटी के शर्मशार कर देने वाले आरोपों के प्रसारित होने के बाद से अवाक से हैं। गृह कलह के कारण एक वर्ष से अधिक समय से अनुरागी का परिवार उनसे अलग रह रहा था। लेकिन यह घर घर की कहानी है। सवाल है तो यह कि इसके पहले उनके परिवार ने सार्वजनिक रूप से मुंह खोलने में संयम दिखाया था। अब अचानक उन्हें इतना तहलकाखेज विस्फोट करने की नौबत क्यों आ पड़ी।
पूरे प्रकरण में पेंच ही पेंच हैं। यह भी एक पहेली है कि कुछ टीवी चैनलों पर धमाका करने के बाद कल्पना अनुरागी ओर आकांक्षा कहाँ भूमिगत हो गयी जो दूसरे पत्रकारों को ढूंढे नहीं मिल रही.. उनकी वाइट्स गृह कलह शुरू के तत्काल बाद की तो नहीं हैं जब उनमे इतना गुस्सा था कि वे अनुरागी के खिलाफ भड़ास निकालने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार थी। क्या कोई उस समय घात लगाए था जसने वक़्त औके के लिए उनका बयान करवा कर एप पास संरक्षित कर लिया हो. अब जबकि विधान सभा चुनाव के लिए सपा में टिकट वितरण की उठा पटक चरम पर है इसका इस्तेमाल कुछ चैनलों को यह सीडी मुहैया करा कर किया गया हो।
अगर यह अनुरागी के खिलाफ साजिश है तो अनुरागी क्यों नहीं बोल रहे. सवाल जायज है पर घर के दर्द ऐसे होते हैं जिस पर रोते चिल्लाते भी नहीं बन पाता। क्या ऐसा ही कोई दर्द पीना अनुरागी की मजबूरी है. विपक्ष भी इन पेचीदगियों के चलते असमंजस में है इसी कारण किसी विरोधी ने अभी तक इस पर सपा को घेरने की जहमत नहीं उठाई. लेकिन साजिश करने वाले बाहरी लोग हैं या पार्टी के अंदर के सवाल यह भी उठेगा?अनुरागी ने दलित नेता होते हुए भी जो हनक बनाई उससे पार्टी के अंदर और बाहर उनके तमाम दुश्मन तैयार हो गए हैं. बहरहाल लोग पुरे मामले की सच्चाई जानना चाहते हैं






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