08orai02

08orai01बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोबिद ने रविवार को दुनिया भर में मनाये जा रहे मदर्स डे पर कटाक्ष करते हुये कहा कि उनके बचपन के दिनों में मदर्स डे नहीं मनता था। यह उन देशों की देन है जिनमें कौटुम्बिक मान्यता सुदृढ़ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में तो समूची नारी शक्ति को तो मातृ शक्ति के रूप में पूजे जाने की परम्परा है। माता, पिता और गुरू के प्रति नित्य श्रद्धा निवेदित करने का जिस देश में चलन हो उस देश में अलग से मदर्स डे मनाने की जरूरत भी क्या है। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि विश्व ग्राम के इस दौर में मदर्स डे मनाने में कोई बुराई नहीं है, इसलिये वे भी आज के दिन सभी माताओं को प्रणाम कह देते है।
श्री कोबिद रविवार की शाम एक पब्लिक स्कूल द्वारा नगर पालिका के सहयोग से निजी गेस्ट हाउस में आयोजित अपने सम्मान समारोह में प्रत्युत्तर सम्बोधन कर रहे थे। उन्होंने जेएनयू और हैदराबाद विश्व विद्यालय के हाल के घटनाक्रम का जिक्र किये बिना आगाह किया कि युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा मिले तो देश का अभूतपूर्व विकास हो सकता है। लेकिन अगर युवा भटके तो देश में भयानक स्थिति पैदा हो जाने का खतरा है। उन्होंने कहा कि चाहे सत्ता की चमक हो या फिर संसाधन की भौतिकतावाद की इस दुनियां में चकाचैंध में उलझकर युवा अपना और समाज का भारी नुकसान कर रहे है। उन्हांेने कहा कि युवाओं को अपने वास्तविक लक्ष्य से कभी नहीं भटकना चाहिये। अगर वे ऐसा कर पाते है तो तय है कि सफलता उनके कदमों को चूमेगी।
इस दौरान बिहार के राज्यपाल ने आयोजकों के आग्रह पर जिले की जिलाधिकारी संदीप कौर और पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार को शाल ओढाकर और अलंकरण देकर सम्मानित किया। नगर पालिकाध्यक्ष गिरजा चैधरी ने राज्यपाल को मुकुट पहनाया। किड्स जी पब्लिक स्कूल की अभिलाषा उपाध्याय ने भी राज्यपाल को सम्मानित किया। साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी, लोक संस्कृति विशेषज्ञ अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद, कवियित्री डा. रेनू चन्द्रा और प्रोफेसर डा.जयश्री पुरवार मंचासीन रहे। आभार प्रदर्शन शैलेन्द्र पाण्डेय ने किया।

Leave a Reply