cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngजालौन-उरई। ब्लाॅक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अधिकांश तालाब आज भी पानी के लिए तरसते नजर आ रहे हैं। तो वहीं, नहरों में भी पानी न होने से पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। पानी के अभाव में रोजाना कई पशुओं की मृत्यु हो रही है। ब्लाॅक क्षेत्र में पड़ने वाले तालाबों मंे मात्र 96 भरे गए जबकि 61 तालाब अभी भी पानी के लिए तरसते नजर आ रहे हैं।
ब्लाॅक क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाली समस्त 62 ग्राम पंचायतों में 157 तालाब सरकारी आंकड़ों में दर्शाए गए हैं। लेकिन बड़े अचरज की बात है कि इन तालाबों में अधिकांश तालाबों में अभी तक पानी नहीं भरा गया है। आसमान से बरस रही आग के चलते जहां आम जनमानस बेहाल है। तो वहीं, पशु पक्षिओं का भी बुरा हाल है। ऐसे में तालाब व नहरों में पानी न होने से प्यास के कारण प्रतिदिन कई पशु, पक्षी असमय काल के गाल में समा जाते हैं। इसके अलावा यदि गांव में अचानक कोई दैवीय आपदा आग आदि लग जाती है तो, तालाब न भरे होने दैवीय आपदा से काफी हानि होने की संभावना हो सकती है। वहीं, गांव वालों की मानें तो स्थानीय प्रशासन तालाबों में पानी भरने के नाम पर प्रतिवर्ष हजारों रूपए व्यय के रूप में दर्शाता है। लेकिन स्थलीय निरीक्षण में प्रशासन की ओर से तालाब कभी नहीं भरे जाते हैं। पूरे ब्लाॅक क्षेत्र में जहां सरकारी नलकूप हैं उन तालाबों को छोड़ दें तो, बाकी तालाब इंद्रदेव की कृपा पर भरते हैं और उसका पूरा श्रेय स्थानीय प्रशासन लेकर कागजी काॅलम पूरा कर हजारों रूपए व्यय के रूप में दर्शा देते हैं। वहीं, मई के महीने में नहरों में आने वाला खैराती पानी भी न आने से पशु-पक्षियों समेत आम जनमानस भी इस भीषण गर्मी में बेहाल है। उधर, तालाब भरवाए जाने के संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ब्लाॅक क्षेत्र में स्थित 157 तालाबों में से 96 तालाब भरवा दिए गए हैं। जबकि शेष रहे 61 तालाबों को भी शीघ्र ही भरवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

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