उरई। मजदूरों, किसानों, मजलूमों और आम आदमी के दर्द को अपनी शायरी से आवाज देने वाले इंकलाबी शायर कैफी आज़मी की चैंदहवीं पुण्य तिथि पर सिटी सेंटर में मुशायरे का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कैफी आजमी की प्रसिद्ध नज़्म दूसरा वनवास की प्रस्तुति रोमांचित करने वाली रही। गौरतलब है कि कैफी साहब ने यह रचना बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद लिखी थी।
भारतीय नाट्य संघ की स्थानीय इकाई और प्रलेस के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार की रात सिटी सेंटर में किया गया आयोजन यादगार रहा। इसमें स्थानीय रंगकर्मियों, शायरों, कवियों, साहित्यकारों और अन्य बुद्धिजीवियों ने शिद्दत के साथ कैफी साहब को याद किया। कहा कि वे एक व्यक्ति नही आंदोलन थे। जिन्होंने सांस्कृतिक कारगुजारियों को पसीने बहाती जिंदगी के साथ जोड़ा। उनकी शायरी एक संदेश के मानिन्द रही। जिसने जाति धर्म जैसी संकीर्ण दीवारों को गिराकर पूरे आवाम को इंसानियत के एक धरातल पर खड़ा करने का काम किया।
कैफी रचित कहदो मिजबा से जाये अंधेरा व मेरी आवाज सुनो और उनकी प्रसिद्ध गजल मैं जिसे ढूढ़ता हूं वो जहां नही मिलता की प्रस्तुति भी श्रोताओं को बेहद तरंगित करने वाली रही। जिसे इप्टा के कलाकारों धर्मेंद्र, दीपेंद्र, धनीराम व संजीव ने जनगीत बनाकर सजाया। बुंदेलखंड के मु. रफी कहे जाने वाले प्रसिद्ध गायक मिर्जा साबिर बेग ने कैफी आज़मी साहब की कुछ नज़्मों को अपने अंदाज में मंच से छेड़ा तो जैसे जादू छा गया।
मुशायरे में नैनीताल से आये प्रसिद्ध जनवादी शायर बल्ली सिंह चीमा और लखनऊ से आये जनवादी शायर ओपी नदीम ने अपनी शायरी से कैफी साहब की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। बल्ली सिंह चीमा ने सुनाया वो जो कर रहा है खुदकुशी इस देश का ही किसान है, कहो गर्व से कहो शान से मेरा देश फिर भी महान है। इसी तरह उनका यह शेर भी बेहद असरदार रहा तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो, आदमी के पक्ष में हो या आदमखोर हो। जीवन संघर्ष की सफलता के प्रति आस्था का उनका यह शेर भी काफी जोश दिलाने वाला रहा। ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के। ओपी नदीम ने सुनाया जिसे जो चाहिए उसको बहना ही बहना था, लेकिन तुम तो पर्वत थे तुमकों तो साबित रहना था। इसी फलसफे में उन्होंने जोड़ा आइना खुद को दिखाने की जरूरत क्या है, शर्म का बोझ उठाने की जरूरत क्या है। कार्यक्रम के अंत में इप्टा के अध्यक्ष काॅ. देवेंद्र शुक्ल ने आभार प्रदर्शन किया। संचालन इप्टा के सचिव संजीव ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से रचना, प्रभा शुक्ला, कैलाश पाठक, सुधीर अवस्थी, डाॅ. आदित्य कुमार, अनिल शर्मा, कविता, नेहा, साखीराम, डाॅ. रेणु चंद्रा, फारुख बफा, नासिर अली नदीम, सुभाष चंद्रा, हरिश्चंद्र तिवारी, बृजेश पांडेय, दलवीर सिंह आदि उपस्थित थे।







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