0 कोंच की विश्व विख्यात रामलीला के कलाकारों ने बैठक कर किया मंथन
कोंच-उरई। कोंच की बहुमूल्य सांस्कृतिक विरासत साढे सोलह दशक पुरानी ऐतिहासिक रामलीला को और भी रुचिकर बनाने तथा दर्शकों की संख्या बढाने की दिशा में रामलीला के रंगकर्मियों ने माथापच्ची शुरू कर दी है। बुधवार की देर शाम यहां बल्दाऊ धर्मशाला में आयोजित रंगकर्मियों की बैठक में निचोड़ निकल कर आया है कि रामलीला के साहित्य को परिष्कृत किया जाये और अनावश्यक चीजों को हटा कर नया लुक दिया जाये ताकि सीमित समय में लीला का मंचन हो सके। इसके अलावा अभी से लीलाओं के पाठ वितरित कर दिये जायें ताकि पात्रों को उन्हें कंठस्थ करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
गल्ला व्यापारियों की नगर की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था श्री धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित ऐतिहासिक रामलीला के रंगकर्मियों की आवश्यक बैठक बल्दाऊ धर्मशाला में रामलीला बिशेषज्ञ रमेश तिवारी की अध्यक्षता और ऋषि झा के संचालन में संपन्न हुई। बैठक का उद्देश्य कोंच की बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर जो अपनी बिशिष्ट परंपराओं के कारण न केवल भारत बल्कि देश की सीमाओं से निकल कर अब्रॉड में भी ख्याति अर्जित करने के साथ साथ लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी है, के मंचन की मौलिकता बनाये रखते हुये समय की मांग के अनुरूप इसमें कुछ बदलाव किए जायें ताकि इसे और भी रुचिकर बनाया जा सके। अधिकांश रंगकर्मियों का मत था कि जो लीलायें चार से छह घंटों में मंचित होती हैं उनके साहित्य को परिष्कृत करने की जरूरत है, साहित्य से अनावश्यक चीजों को हटा कर इन्हें अधिकतम तीन घंटे की अवधि में समायोजित किया जा सकता है। ऐसा करके इसके दर्शकों की संख्या में आने बाली गिरावट को रोका जा सकता है और इस अमूल्य थाती को परम वैभवशाली बनाया जा सकता है।
इस दौरान रंगकर्मियों ने यह भी सुझाव दिया कि मंचन के दौरान सांकेतिक विभाग की कम से कम सहायता लेने के लिए अभी से लीला वाइज पाठों का वितरण कर दिया जाये ताकि पात्रों को उसे कंठस्थ करने का पर्याप्त समय मिल सके। यह भी तय किया गया कि सप्ताह में दो बार रिहर्सल होगी जिसमें पात्रों की प्रस्तुतियों में छिद्रान्वेषण करते हुए कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी। साहित्य को समृद्ध बनाने और पुनर्मूल्यांकित करने की जिम्मेदारी पुरुषोत्तमदास रिछारिया, नरोत्तम दास स्वर्णकार तथा दुर्गेश शुक्ला पर डाली गई है। रिहर्सल का संयोजक डॉ. मृदुल दांतरे तथा उनके सहयोगी के रूप में अतुल शर्मा व सूर्यदीप सोनी को नामित किया गया है। इस दौरान वीरेन्द्र त्रिपाठी, अभिषेक रिछारिया पुन्नी, राजेन्द्र भारद्वाज, राकेश गिरवासिया, नीरज दुवे, निर्भय यादव, आनंद पांडे, पवन गौतम, राघवेन्द्र शर्मा, गौरीशंकर झा, राहुल राठौर के अलावा धर्मादा के पदाधिकारी प्रेमनारायण राठौर भी खासतौर पर मौजूद रहे।







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