cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। छोटे मियां तो छोटे मियां बड़े मियां सुभान अल्लाह कुछ ऐसा ही हो रहा है राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल में। जिला अस्पताल में तो इलाज के लिये पैसे मांगे जाने की शिकायतें आम थीं लेकिन मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टर भी उनके नक्शे कदमों पर चल पड़ेंगे। इसका अनुमान नहीं किया जा रहा था।
राजेन्द्र नगर मोहल्ला निवासी लल्लूराम ने 1 मई को पत्नी के साथ हैवानियत दिखाते हुए गम्भीर मारपीट की जिसमें उसकी पत्नी अमृत कुमारी के बायें पैर में फ्रैक्चर हो गया। अमृत कुमारी इसका इलाज कराने के लिये मेडिकल कालेज पहुंची क्योंकि उसे उम्मीद थी कि मेडिकल कालेज के भले डाक्टर उसका बेहतर तरीके से बिना कोई खर्चा लिये इलाज कर देंगे लेकिन मेडिकल कालेज के डाक्टर विवेक निरंजन का तो मुंह जिला अस्पताल के डाक्टरों से भी बड़ा निकला। उन्होंने अमृत कुमारी से दस हजार रुपये इलाज का खर्चा मांगा। जिसे देने में अमृत ने असमर्थता दिखाई तो विवेक निरंजन का पारा गरम हो गया और उन्होंने गाली गलौज करते हुए अमृत कुमारी को अस्पताल से भगा दिया।
अमृत कुमारी ने इस बदसलूकी के खिलाफ डीएम को दरख्वास्त दी है। गौरतलब है कि डीएम खुद आते ही आते मेडिकल कालेज अस्पताल में व्याप्त रवैये का स्वाद चख चुकी हैं। जब उन्हें रात में अचानक अस्पताल के निरीक्षण के लिये पहुंचने पर इमरजेंसी में डाक्टर नदारद मिले थे। इसके बाद उन्होंने अधीक्षक को बुलाने की कोशिश की तो उन्होंने डीएम का मोबाइल तक रिसीव नहीं किया। डीएम ने इसके बाद सभी उपजिलाधिकारियों को समय-समय पर अस्पतालों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिये थे ताकि स्थितियां बेहतर हो सकेें लेकिन लगता है कि यह निर्देश फाइलों में दफन हो गया। उक्त घटना के बाद से डीएम और किसी एसडीएम को अस्पतालों की खैरियत जानने की फुर्सत नहीं मिली जिससे मेडिकल कालेज अस्पताल में डाक्टरों की निरंकुशता बरकरार रही।

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