उरई। इप्टा के स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा.सतीश चन्द्र शर्मा ने कहा कि अन्धविश्वास एवं साम्प्रदायिकता की चुनौतियां, इप्टा के जन्म के समय से मौजूद हैं जिनसे यह देश आज तक नहीं उबर पाया है।
भगत सिंह पार्क में बुधवार की शाम वर्तमान समय की चुनौतियों में सांस्कृतिक आन्दोलन की भूमिका विषय पर गोष्ठी आयोजित हुई। कोषाध्यक्ष मुन्नालाल नामदेव ने कहा कि इप्टा की स्थापना समाज में व्याप्त शोषण, भेदभाव, अंधविश्वास व तमाम कुरीतियों को दूर करने के लिये हुई। धनीराम ने कहा कि रंग कर्म मनुष्य की दुनिया में नये-नये और सकारात्मक पहलुओं को विकसित करता है। प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष डा.रामाधीन ने कहा कि सांस्कृतिक कर्म या रंग कर्म सामाजिक क्रिया कलापों की एक प्रतिलिपि है। का.रामेश्वर दयाल बाजपेयी ने कहा कि सभ्यता के साथ-साथ संस्कृति का विकास होता है और सांस्कृतिक आन्दोलन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। अध्यक्षता गांधी महाविद्यालय के बीएड विभाग के प्रवक्ता धर्मेन्द्र ने की। संचालन महासचिव राज पप्पन ने किया।
परिचर्चा में रंग कर्मी दीपेन्द्र, संदीप ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के अन्त में जनगीत वह सुबह कभी तो आयेगी तथा बुन्देलखण्ड के सूखा पीडि़त किसानों की दशा पर लोकगीत बुन्देलखण्ड की धरती तड़प-तड़प कर चिल्लावै गाया। अमर गौरव, का.नूर अफसर, अवधेश शर्मा, हेमन्त, अंकित आदि लोग भी उपस्थित थे।







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