27orai02सिरसा कलार-उरई। एक ओर भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा राजनीति में चल रही परिवारवाद की परंपरा को सीचने के लिए अपने पुत्र को जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में करारी हार के बाद विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी बनवाने का तानाबाना बुन रहे हैं। दूसरी ओर लोगों के प्रति बेरुखी के रवैये की वजह से उनका अब जगह-जगह खुला विरोध होने लगा है। जिसे विधानसभा चुनाव के पूर्व पार्टी के लिए अशुभ संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि जालौन में रेल लाओ आंदोलन उनके प्रति लोगों के गुस्से की वजह से ही दो माह तक चलने का इतिहास रच गया। फिर भी भानुवर्मा के रवैये में सुधार नही आया है। पार्टी कार्यकर्ताओं तक उनसे भेंट करने को तरस जाते हैं। न तो उनकी जनसंपर्क में रुचि है और न ही विकास कार्य कराने का उत्साह। नतीजतन गैरों में ही नही अपनों में भी वे खलनायक बनते जा रहे हैं।
भानुवर्मा पार्टी के निर्देशों की वजह से शुक्रवार को यहां के संेगर गेस्ट हाउस में जब कार्यकर्ताओं की बैठक करने आये तो पार्टी के लोगों को उनके रवैये के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने का मौका मिल गया। क्षेत्र के खोड़न और जरगांव में विद्युतीकरण कराने की गुहार उनसे कई बार लगाई जा चुकी थी लेकिन एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देने में माहिर भानुवर्मा ने इस गुहार को भी अनसुना कर दिया जो आज उनकी फजीहत का कारण बन गया। ग्रामीणों ने कार्यकर्ता मीटिंग में उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर अपनी भड़ास निकाली। भानुवर्मा को उनका जबाव देते नही बना। क्षेत्रीय नेताओं ने किसी तरह ग्रामीणों को शांत किया। तब भानुवर्मा को चैन मे चैन मिला।

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