उरई। दागी पुलिसकर्मियों के लिए अफसरों का प्रेम उन पर भारी पड़ने लगा है। पीड़ितों की इस मामले में बगावती मुद्रा सतह पर आने का एक और मामला सामने आया जब मौरंग माफियाओं की गोली के शिकार बंधौली के ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कलैक्ट्रेट में जोरदार धरना दिया। इस दौरान आयोजित सभा में ग्रामीणों ने अवैध खनन की पोल खोलते हुए सरकार और प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी।
डकोर थाने का सीधासाधा मेहनतकश बाशिंदों का बंधौली गांव पीला सोना कही जाने वाली मौरंग की वजह से खुशहाली की अपनी फितरत गवां कर एक अभिशप्त गांव में तबदील हो चुका है। इस गांव में गत् 16 मार्च को सुबह-सुबह मौरंग माफियाओं की बंदूकें तड़तड़ाने लगीं। इसमें लखचंद्र ग्रामीण मारा गया। जबकि प्रानसिंह और गजेंद्र गोलियां लगने से बुरी तरह घायल हो गये। बकौल ग्रामीणों के डकोर थाने का सिपाही धर्मेंद्र न केवल गोली चलाने वाले आततायियों का साथ दे रहा था बल्कि उसने खुद भी प्रान सिंह पर गोली चलाने में गुरेज नही किया। इसके बावजूद पुलिस के अफसर गोली चलाने वाले मौरंग माफियाओं की तो खैरख्वाही कर ही रहे हैं विभागवाद को पोसने के लिए खाकी को कलंकित करने वाले धर्मेंद्र सिपाही को बचाने में भी कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। ग्रामीणों के प्रदर्शन की वजह से अवैध खनन को लेकर प्रशासन की थू-थू होती रही। हालांकि जब अवैध खनन हो रहा था उस समय जिले में वर्तमान अधिकारी तैनात नहीं थे। बंधौली गोलीकांड की वजह से हुई बदनामी के चलते ही सरकार को जिले के प्रशासन का चेहरा बदलने के लिए बाध्य होना पड़ा था।







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