कोंच-उरई। यहां चैबे पार्क में जारी इप्टा के ग्रीष्मकालीन नाट्य प्रशिक्षण शिविर में बीती शाम बाल रंगकर्मियों ने अब तक की सीखी कई प्रस्तुतियां दी। इस दौरान संगीत के क्षेत्र के महान कलाकार इंदु तिवारी ने कहा कि चाहे साहित्य का क्षेत्र हो या संगीत का या फिर कला का, इनका सुख और आनंद ठीक उसी तरह है जैसे कोई सपनों के सागर में नौका विहार का परम आनंद प्राप्त कर रहा हो।
रंगकर्मियों को संबोधित करते हुये तिवारी ने कहा कि संगीत को सुनने या गायन में मिलने बाले आनंद को शब्दों में नहीं बयान किया जा सकता है। इप्टा से जुडने के बाद उन्होंने बहुत कुछ सीखा और जाना है तथा प्राप्त ज्ञान को साधन मान कर वह अपनी साधना में लगे हैं और संगीत के क्षेत्र में वह नवजातों को दक्ष करने में अपना परम सौभाग्य समझ रहे हैं। इप्टा के कोंच में संस्थापक अध्यक्ष एवं मौजूदा में प्रांतीय सचिव डॉ. मोहम्मद नईम ने कहा कि रंगमंच के लिये यह निहायत ही जरूरी है कि वह समझ से पैदा होने बाले रोमांच को प्रोत्साहित करें और लोगों को यथार्थ में परिवर्तन करने से प्राप्त होने बाले आनंद का प्रशिक्षण दे। जब तक अभिनेता पात्र को महसूस नहीं करेगा तब तक वह उस पात्र का अभिनय नहीं कर सकता है, अभिनय करने के लिये किरदार में डूबना पड़ता है। इप्टा अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि सच्ची कला और सच्चा कलाकार वही है जो आदमी को बदलने की कशिश रखता हो। कार्यशाला के उन्नीसवें दिन रंगकर्मियों ने कई नाटकों की जानदार प्रस्तुतियां दीं। जनगीतों की भी सशक्त प्रस्तुतियां रहीं। विभिन्न प्रशिक्षणों में हारून कादरी, तलत खान, शिवांगी चतुर्वेदी, नीहारिका मिश्रा, पारसमणि अग्रवाल आदि सहयोग कर रहे थे। इस दौरान अनिल वैद, ओमप्रकाश उदैनिया, राकेश शुक्ला, सेठ नासिर सहित तमाम अतिथि मौजूद रहे।
सामाजिक विद्रूपताओं को बखूबी उकेरा दर्पण के रंगकर्मियों ने
सांस्कृतिक संस्था दर्पण जन कल्याण समिति द्वारा यहां कमला नेहरू बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित किये गये ग्रीष्म कालीन नाट्य प्रशिक्षण शिविर एवं समर कैम्प में डेढ सैकड़ा बाल एवं युवा रंगकर्मियों को नाटक, जनगीतों, मेंहदी, गायन आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आज यहां रंगकर्मियों ने जनगीतों की बहुत ही शानदार प्रस्तुतियां दीं। सामाजिक विद्रूपताओं को रंगकर्मियों ने एक नाटक पानी रे पानी तेरा रंग कैसा के जरिये इतनी खूबसूरती से उकेरा कि अतिथियों ने उन्हें जमकर शाबाशी दी। संस्था अध्यक्ष डॉ. मृदुल दांतरे, प्रशिक्षक सूर्यदीप सोनी, दीपू सोनी, सुमित झा, ऋषि झा, अन्नू मलिक, शिवाली दुवे आदि के निर्देशन में प्रस्तुत कव्वाली के माध्यम से राजनीति में आई गिरावट और आज के नेताओं के स्वार्थपरक चलन को उकेरा। वरिष्ठ रंगकर्मी मोहनदास नगाइच ने अतिथि के तौर पर बच्चों का उत्सावर्द्धन करते हुये कहा कि उन्होंने अल्प समय में तैयार नाटक को देखा और वह दावा कर सकते हैं कि ये बच्चे आगे चलकर जरूर नाम रोशन करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कहीं उनकी आवश्यकता महसूस हो तो वह संहर्ष तैयार हैं। वरिष्ठ पत्रकार द्वय रमेश तिवारी और पुरुषोत्तमदास रिछारिया ने बच्चों और आयोजक संस्था की वर्ष भर संपर्क में रहने की आवश्यकता जताते हुये कहा कि जो कुछ सीखा और सिखाया गया है उसे सामाजिक या राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में आवश्यकतानुसार लोगों को जगाने का काम नुक्कड़ नाटकों और जनगीतों के माध्यम से करते रहना चाहिये।







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