उरई। हाईटेक व्यवस्थायें क्या करें जबकि अधिकारी पाषाणकालीन माइंडसैट से बाहर नही निकल पा रहे। हालत यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच के लिए भेजी जाने वाली आॅन लाइन शिकायतों तक को अधिकारी कम्प्यूटर आॅन करके देखना गंवारा नही करते। उनका निस्तारण तो दूर की बात है।
कलैक्ट्रेट सभाकक्ष में सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना ने आईजीआरएस की समीक्षा बैठक की। जिसमें ई-गवर्नेंस चिघ्घाड़े मारती नजर आई। बौखलाये सिटी मजिस्ट्रेट ने विभागाध्यक्षों को आगाह किया कि अगर 15 दिन के अंदर आॅन लाइन प्राप्त शिकायतों का निस्तारण न हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।
जनसुविधा केंद्रों द्वारा संचालित 40 सेवाओं का भी हाईटेक होने से कवाड़ा निकल गया है। आॅन लाइन आवेदनों पर अधिकारी रिपोर्ट ही नही लगाते तो निस्तारण कैसे हो। ई-गवर्नेंस के जिला प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारी अतिशीघ्र आॅन लाइन आख्या दाखिल करें जिससे विलंबित आवेदनों पर त्वरित गति से प्रमाणपत्र जारी हो सकें।
इस अवसर पर इंचार्ज सीएमओ डाॅ. आशाराम, सभी उप जिलाधिकारी, डीआरडीए के परियोजनाधिकारी चित्रसेन सिंह उपस्थित थे।







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