उरई। जिला प्रशासन दूरवर्ती गांवों में तो अपना हस्तक्षेप दिखा पाने में कामयाब हो ही नही पा रहा। जिला मुख्यालय तक पर पेयजल संकट हल करने में उसकी बेवसी से लोगों की चितांयें बढ़ गई हैं।
गर्मी इस समय चरम पर है। नौतपा के आखिरी दिन होने से पूरा जनजीवन बेहाल है। गर्मी की प्रचंडता की वजह से पाताल का पानी सूखने लगा है जिससे हैंडपंपों और नलकूंपों से काफी कम पानी बाहर निकल पा रहा है। ऐसे में उन मोहल्लों की शामत है जो सर्दी के मौसम से ही पेयजल संकट से दो-चार हैं। इनमें सबसे प्रमुख है लघु सिचाई स्टोर के पीछे चुर्खी बाईपास के पास बसा मोहल्ला। लगभग तीन हजार परिवार के इस मोहल्ले में पानी के लिए हाहाकार मचा है। छह महीने पहले यहां एक नलकूंप स्थापित कराया जा चुका है। अगर जिला प्रशासन सूझबूझ का परिचय देता तो गर्मी शुरू होने के पहले ही पाइप लाइन बिछवाकर सप्लाई शुरू करा दी गई होती लेकिन संवेदनहीनता की हद है कि जिला प्रशासन ने यह जानते हुए भी कि सूखे की वजह से गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने के लिए कैसी मारामारी मचेगी इस पर गौर नही किया। नतीजा यह है कि आज मोहल्ले में त्राहि-त्राहि मची है। बहुत से लोग तो अपने घर में ताला लगाकर रिश्तेदारियों में रहने चले गये हैं।
दलित चितंक पंकज सहाय ने जिलाधिकारी संदीप कौर को ज्ञापन देकर चुर्खी बाईपास मोहल्ले के लोगों की इस भीषण समस्या की ओर उनका ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने डीएम को चेतवानी भी दी कि अगर सर्वोच्च प्राथमिकता पर संज्ञान में लेकर युद्ध स्तर पर उक्त मोहल्ले में पाइप लाइन बिछवाकर अविलंब पेयजल आपूर्ति शुरू न कराई गई तो अनशन व अन्य गांधीवादी तरीके से जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया जायेगा।







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