03orai01उरई। नीली बत्ती लगी गाड़ी में बैठे दरोगा को देखकर चैकिंग में निकल जाने देना पुलिस को मंहगा भी पड़ सकता है। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्कर व बदमाश नीली बत्ती की आड़ लेना सीख चुके हैं। आतंकवादी और नक्सली भी नीली बत्ती लगी गाड़ियों में छुटटा घूमने की फिराक में हैं। शुक्रवार को पुलिस ने तस्करी की शराब ढोने के लिए इस्तेमाल की जा रही नीली बत्ती लगी स्कार्पियों को पकड़ा। क्या इसके बाद जिले की पुलिस हर गाड़ी को चैक करने का सबक सीख सकेगी।
उत्तर प्रदेश में नीली, लाल बत्ती लगी, सपा के झंडे वाली और अन्य विशिष्ट चिन्ह व नाम प्लेट वाली गाड़ियों को कैसी भी चैकिंग में बिना टोकाटाकी के गुजर जाने देने का रिवाज सा बन गया है। इसलिए ऐसी गाड़िया बदमाशों की सुरक्षित पनाहगाह बन गई हैं। डकोर थाना क्षेत्र में गुरुवार को देर रात मुहाना की तरफ से स्कार्पियों में भी नीली बत्ती लगाकर चैकिंग में सुरक्षित निकल जाने का इंतजाम था। लेकिन शराब तस्कर की इस गाड़ी को कल चलाने वाला ड्राइवर और कारिंदे नये होने की वजह से अक्ल और हिमंत में कच्चे थे जिसके कारण चैकिंग देखकर वे सिखा-सिखाया पहाड़ा भूल गये। ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी और उसमें से उतर कर लोग भागने लगे जिससे पुलिस उनके पीछे दौड़ पड़ी और दो लोगों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार लोगों ने अपने नाम राकेश शिवहरे निवासी खंडेराव थाना कोतवाली जालौन और अभिषेक भदौरिया निवासी गुलाब की गड़िया थाना बड़पुरा जिला इटावा बतायें। जिनके कब्जे से दो 315 बोर के तमंचे कारतूस सहित बरामद किये गये। राकेश शिवहरे के पास से पुलिस सब इंस्पैक्टर का फर्जी परिचय पत्र भी मिला। उसने बताया कि कई बार वह अवैध शराब की खेप स्कार्पियों से लेकर पुलिस चैकिंग को धता बताकर निकल गया। गाड़ी की नीली बत्ती और दरोगा का कार्ड देखकर कोई भी उसकी गाड़ी को नही रोकता था। उसने कहा कि आज दूसरे लोगों के गाड़ी से उतर कर भागने लग जाने से वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
अपर पुलिस अधीक्षक शकील अहमद ने पुलिस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में इस गुडवर्क का अदभुत गुणगान करते हुए बताया कि दोनों ही आरोपियों का पहले से ही आपराधिक इतिहास है। उन्होंने इस सिलसिले में डकोर थानाध्यक्ष जाकिर हुसैन और स्वाॅट टीम निरीक्षक वेदप्रकाश चतुर्वेदी की पीठ खासतौर से थपथपाई।

दर्जनों लोग कर रहे हैं शराब की तस्करी का धंधा
पकड़े गये शराब तस्कर राकेश शिवहरे ने जिले के तमाम अन्य अवैध शराब धंधागीरों के नाम उजागर किये। उसके बयान से यह जाहिर हो गया कि जिले में महीनों से बड़े पैमाने पर अवैध शराब का धंधा पुलिस प्रशासन के सोये रहने की वजह से चल रहा है। खाकी अफसरों ने पत्रकार वार्ता अपनी वाहवाही के लिए बुलाई थी। लेकिन उन्होंने ही पत्रकार वार्ता में राकेश शिवहरे के बयान का वह नोट बटवा दिया जिससे विभाग की नाक सबके सामने कट गई।
राकेश ने बताया कि अवैध शराब का थोक सप्लायर ग्वालियर का महेश गुप्ता है। उससे माल लेकर वह जिले में निक्की, मनोज ठाकुर, धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र राजपूत बम्हौरी, भूपेंद्र यादव मवई, श्याम शिवहरे, श्यामू पटेल, मंशाराम नरी, देवकीनंदन शिवहरे, सत्यप्रकाश सलैया, सत्येंद्र राजपूत करमेर, सुशील कुसमी, मंजे चिल्ली, जितेंद्र भदौरिया, बाबू टिमरों, रिंकू सतोह, राजू राजपूत कुसमिलिया, कल्लू गुर्जर सहाव, अरविंद यादव झांसी, नरेश यादव उर्फ बब्बा, भानु महाजन जालौन, संतोष चैहान बोहदपुरा, पप्पू यादव खरकोश थाना मोंठ को वितरित करता है। उसके अलावा राघवेंद्र सिंह सिरसा दोगढ़ी, जितेंद्र भदौरिया नीमगांव, कल्लू गुर्जर सहाव, कल्लू यादव कालपी, भूपेंद मवई, मानवेंद्र निवासी टांडा थाना मोठ, और राजू राजपूत कुसमिलिया सीधे थोक सप्लायर से ट्रकों से शराब मंगाकर बेंचते हैं। ग्वालियर के महेश गुप्ता के अलावा ग्वालियर का ही राजू भदौरिया भी बड़ा सप्लायर है जो इंदौर, चंडीगढ़ व हरियाणा की शराब रास्ते के सारे थानों में कनेक्शन फिट करके मंगाता और बिकवाता है। औरैया का भोले तोमर, कोमल राजपूत, सुरेश दुबे और दीक्षित जिसका उसे पूरा नाम पता नही है भी बड़े सप्लायर हैं। उसने कहा कि केवल 20 से 25 मिनिट में शराब का पूरा ट्रक अनलोड हो जाता है।

अभिषेक का मनहूस साया राकेश को भी ले डूबा
राकेश के साथ पकड़ा गया अभिषेक भदौरिया बलात्कार के मुकदमें में जेल जा चुका है। उसका संपर्क राकेश शिवहरे से इटावा जेल में हुआ था। उसने बताया कि वह इटावा के ही बड़पुरा थाने के कामेद गांव निवासी सोनू के लिए चोरी की बाइक इधर से उधर करने में सहयोग करता था। जिसके बदले उसे एक बाइक पर 900 सौ रुपये मिलते थे। इसके बाद उसने अपना प्रमोशन कर लिया और खुद बाइक चुराकर बेचने लगा। बाइक चोरी में नीरज प्रजापति भर्थना, सौरभ दीक्षित भर्थना, कल्लू यादव पाली, सर्वेश यादव जसवंत नगर, रिंकू यादव जसवंत नगर, अतुल चैधरी, अंकित चैधरी मानिकपुर मोड़, सचिन जाटव नगला धवन, छोटे खान फिरोजाबाद के साथ उसने बाइक चोरी का गिरोह बना लिया था। लेकिन बाइक चोरी के धंधे में रिस्क था इसलिए चार-पांच महीने पहले उसने राकेश शिवहरे से जुड़कर अवैध शराब की सप्लाई शुरू कर दी थी। लेकिन उसके कदम ही मनहूस हैं जिससे उसे तो पकड़ना ही था उसके चक्कर में राकेश शिवहरे भी इतनी चालाकी के बावजूद पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

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