cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। गत् वर्ष विद्युत करंट से मौत के बाद जालौन-औरैया रोड पर लगे जाम और भीड़ द्वारा की गई तोड़ फोड के मामले में पुलिस निर्दोष नागरिकों का उत्पीड़न कर रही है। एसपी को क्षेत्र के लोगों ने ज्ञापन देकर मुकदमे की जांच कर रहे विवेचनाधिकारी को बदलने की मांग की है।
थाना कुठौंद के ऊमरी मुस्तकिल में 4 सितंबर 2015 को विद्युत करंट से एक लड़के की मौत हो गई थी। इससे लोग भड़क उठे थे और औरैया रोड जाम करके लोगों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया था। अधिकारियों ने पहले तो उग्र भीड़ से हमदर्दी जताते हुए प्रदर्शन खत्म कराने का मतलब साध लिया। लेकिन इसके बाद एसडीएम जालौन के चालक नसीरउल्ला की ओर से 15 लोगों को नामजद व 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा तोड़फोड़ सरकारी कार्य में बाधा डालने आदि से संबंधित संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
एसपी को प्रार्थना पत्र देने आये देवेंद्र, पप्पू व श्रीगोविंद निवासीगण मसगांव ने बताया कि उन्हीं के नाम के ऊमरी मुस्तकिल के निवासी मुकदमें मे नामांकित कराये गये थे लेकिन विवेचनाधिकारी ने हेराफेरी कर उनकी जगह हम लोगों के नाम चढ़ा दिये जबकि हम लोग मसगांव के निवासी हैं। देवेंद्र व पप्पू तो गांव में रहते भी नही हैं। क्योंकि चार वर्षाें से वे फरीदाबाद में रहकर मेहनत मजदूरी कर रहे हैं। दूसरी ओर श्रीगोविंद 70 वर्ष के हैं। जिनसे बलवे की उम्मीद कैसे की जा सकती है। जब इनके घर पर विवेचनाधिकारी ने नोटिस चस्पा किये तब इन्हें अपने खिलाफ कार्रवाई की जानकारी हुई। तीनों ने कहा है कि विवेचनाधिकारी के इस अन्याय को खत्म कराने के लिए मामले की जांच किसी और दरोगा को स्थानांतरित की जाये। एसपी ने सीओ से जांच कराकर फैसला लेने का आश्वासन दिया।

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