कोंच-उरई। बीहड़ में बसे ऐसे गांवों जहां विकास की एक भी किरण आजादी के सत्तर साल बाद भी नहीं पहुंच सकी है, के बच्चों की शिक्षा की दयनीय दशा को दूर करने और वहां के बच्चों को भी अच्छी से अच्छी शिक्षा मुहैया कराने को लेकर यह एक सोच फाउंडेशन लखनऊ एवं समर्पण जन कल्याण समिति कोंच के संयुक्त तत्वाधान में जनपद जालौन के ब्लॉक नदीगांव के बीहड़ क्षेत्र में बसे नई मऊ, मऊ भरतपुर, लाड़ूपुरा गांवों के 10 से 17 बर्ष के बालक बालिकाओं के साथ फोकस गु्रप डिस्कशन का कार्य किया गया जिसमें श्यह एक सोच फाउंडेशन्य के निदेशक जीशान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के गरीब समुदाय के अधिसंख्य बच्चे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करते हैं। शिक्षा से ही सामाजिक भेदभाव व गैरबराबरी को समाप्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा का स्तर शिक्षा के अधिकार से ही संभव ह,ै अतरू सरकारी प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूलों में गुणवत्ता सुधार जरूरी है। यूनिसेफ के सहयोग से बुंदेलखंड क्षेत्र के जनपद जालौन के नदीगांव ब्लॉक अंतर्गत बच्चों के सपनों का स्कूल के बारे में जिस प्रकार से बीहड़ क्षेत्र में बसे ग्राम मऊ भरतपुर के 10 से 17 आयु वर्ग के बच्चों के साथ आयोजित फोकस गु्रप डिस्कशन में खुलकर बच्चों ने बातचीत की तथा गुदरी में छिपे लाल की तरह बेबाकी व निर्भीकता से बात रखने में फाउंडेशन की मधुलिका, अभिषेक एवं तनु ने उत्प्रेरक की भूमिका को बखूबी निभाया तथा खुलकर बातचीत का सिलसिला प्रारम्भ हुआ। गांव मऊ के बालक बालिकाओं ने कहा कि वे सभी गरीब परिवारों से हैं, वे चाह कर भी शहरों में अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ सकते हैं जबकि बहुत पढना चाहते हैं। कल्पना व रूबी जहां डाक्टर बनने की ख्वाहिश रखती है तो वहीं ओमप्रकाश, राजा व रामजानकी इंजीनियर बनना चाहते हैं। गोविंद एक अच्छा किसान बनना चाहता है तो श्यामसुंदर पढ लिखकर वैज्ञानिक बनना चाहता है।
सभी बालक बालिकाओं ने एक स्वर में कहा कि उनका स्कूल जंगल के बीच में है जहां उन्हें डर लगता है। बच्चों ने बताया कि विद्यालय में साफ सफाई नहीं होती है, अध्यापक जब कभी विद्यालय आते हैं, विद्यालय की छत से पानी टपकता है, मिड डे मील नहीं बनता है, विद्यालय के गेट अनुपयोगी हैं, खेलकूद का समान नहीं है, विद्यालय में फर्नीचर व लाईट नहीं है। बच्चों ने बेबाकी से कहा कि विद्यालय में जाति व गरीबी अमीरी के कारण भेदभाव नहीं होना चाहिये, खेलने के लिये पूरा खेल का समान होना चाहिये, विद्यालय में बच्चों को प्रोत्साहन हेतु प्रतियोगितायें व कार्यक्रम समय समय पर आयोजित होना चाहिये। समर्पण जन कल्याण समिति की शिवानी श्रीवास्तव ने कहा शिक्षा बच्चों का बुनियादी हक है तथा भेदभाव रहित प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के सुधार हेतु समर्पण जन कल्याण समिति विद्यालय प्रबंधन समितियों को जवाबदेह बनाने, आधारभूत सुविधाओं के लिये सरकार से संवाद स्थापित कराने में पूरा सहयोग करेगी। शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत प्राप्त होने बाली सुबिधाओं की बच्चों तक पहुंच बनाने के लिये यूनिसेफ श्यह एक सोच फाउंडेशन्य मिलकर काम करेगें ताकि प्रत्येक बालिका विद्यालय में अपनी पहुंच बना सके। इसके साथ कुपोषण एवं भूखमुक्त के लिये समुदायिक सहभागिता से समर्पण अपना योगदान देगी। समर्पण के बलवीसिंह व प्रदीपकुमार सिंह ने पूरे कार्यक्रम के आयोजन व संचालन में सहयोग किया तथा पर्यावरण शिक्षा व विद्यालय स्वास्थ्य हेतु समिति द्वारा सहयोग करने का संकल्प लिया गया।







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