30orai06कुठौंद-उरई। उच्चतम् न्यायालय की हनक से भी बेखौफ है यूपी का प्रशासन। उच्चतम् न्यायालय ने तालाबों को बचाने के लिए सरकारों और प्रशासन को कुछ वर्ष पहले जमकर टाइट किया था जिसके आधार पर आज तक तालाबों से अतिक्रमण खत्म कराने के कागजी सर्कुलर जारी किये जा रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन की ढील पोल से तालाबों को पाटकर उन्हें रिहायशी एरिया में तब्दील किया जा रहा है।
इसका खुला सबूत किसी को देखना है तो उसे ब्लाॅक क्षेत्र के गोरा राठौर गांव का दौरा करना चाहिए। गांव की आबादी संख्या 256 में दर्ज तालाब पर 75 प्रतिशत कब्जा मकान बनाकर किया जा चुका है। नंबर 257 पर दर्ज तालाब पर 25 प्रतिशत और 278 पर दर्ज तालाब पर 50 प्रतिशत हिस्से में पक्के मकान बन चुके हैं।
प्रधान विनीता सिंह ने एसडीएम से इसकी शिकायत की थी जिसके बाद उनके निर्देश पर पहले तैनात लेखपाल जान मोहम्मद जांच करने आये और पैसा लेकर उन्होंने सभी को अभय दान दे दिया। उनके स्थान पर आये नये लेखपाल तेजपाल तो उनसे दो पनहइयां आगे चल रहे हैं। जिन्होंने न केवल सभी अवैध कब्जे धारकों को पूर्ण संरक्षण प्रदान कर रखा है बल्कि पैसे लेकर वे दूसरे लोगों को भी तालाब की जमीन पर मकान बनाने की छूट दे रहे हैं और कह रहे है कि बाद में वे वाकायदा उन लोगों का आवासीय पटटा करके कब्जे को वैध करा देंगे।
गांव के निवासी वीरबहादुर, राजू सिंह, हल्के, कोमल, महेश, सर्वेश, सुरेंद्र, जितेंद्र आदि ने कहा कि जहां एक ओर सीएम अखिलेश बुंदेलखंड में ज्यादा से ज्यादा तालाब खुदवाने का अभियान छेड़े हुए हैं वही यूपी सरकार के लेखपाल खुदे-खुदाये पुराने तालाबों का वजूद मिटाकर जिले को तालाब विहीन कराने में कसर नही छोड़ रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारी लेखपालों की लगाम कसने के लिए जागरूक नही हैं जो एक बड़ी विडंबना है।

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