उरईkisaan। भारतीय किसान यूनियन ने किसानों की समस्याओं को लेकर आज कलेक्टेªट परिसर में हंगामी धरना प्रदर्शन करते हुए प्रदेश सरकार को कोसा। भाकियू कार्यकर्ताओं ने शासन एवं प्रशासन पर किसानों की बर्बादी का तमाशा देखने का भी आरोप लगाया।
आज कलेक्टेªट परिसर में बड़ी संख्या में जुटे भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं की धरना सभा की अध्यक्षता रामनारायण भगत ने की और संचालन द्विजेन्द्र सिंह निरंजन ने किया। धरना सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराम सिंह लम्बरदार ने केन्द्र एवं प्रदेश सरकार पर किसानों की बर्बादी का तमाशा देखने का आरोप लगाया उन्होंने अन्ना जानवरों से बर्बाद हो रही फसलों को बचाने के लिए कारगर कदम न उठाने सहित किसानों की कई समस्याओं की ओर शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया। धरना सभा को राजवीर सिंह जादौन, डा. केदारनाथ, रामलखन इटा, ब्रजेश सिंह राजपूत, जेंटर सिंह, सुरेश सिंह चैहान, कृष्णगोपाल, भगवानदास, चतुर सिंह, गजेन्द्र सिंह, राजू मल्थुवा, चंद्रपाल सिंह गुर्जर, राजू गढर, रामनाथ प्रभाकर, नवीन पांडेेय, महेन्द्र सिंह, सतेन्द्र ंिसंह, सुरेश सिंह प्रधान, अरविंद्र बब्बा, देवसिंह, जगमोहन आदि लोगों ने भी संबोधित किया बाद में दस सूत्रीय मांगपत्र प्रशासन को सौपा गया। जिसमें कहा गया है कि जनपद में उरई, कोंच मार्ग के साथ सभी सड़के क्षतिग्रस्त हो गई है जिनकी मरम्मत कराई जाए, विगत रबी फसल का बीमा अभी तक नही दिलाया गया है। जबकि मई माह तक आ जाता था इस बीमा की राशि ब्याज सहित किसानों के खातों में भेजी जाए, अतिवृष्टि के बजह से जो फसले खरीफ में बोई गई थी वह पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बारिश से नष्ट हुई फसलों का खेतवार सर्वे कराकर दैवीआपदा फंड सेे राहत सहायता व बीमा का लाभ दिलाया जाए, क्राप कटिंग में जो गांव छूट गए उन्हें शामिल कर बीमा राशि दिलाई जाए, अन्ना जानवरों से फसलों को बचाने के गौशालाए, तार फैंसिंग एवं पुलिस बल द्वारा कार्यवाही कर अन्ना प्रथा से मुक्ति दिलाई जाए, ग्रामीण क्षेत्रों के जर्जर झूलते तार व झुके बिजली के खंभों को शीघ्र ठीक कराया जाए, जनपद में गांव में गंभीर बीमारियों के प्रकोेप से लोगों में दहशत है स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा टीमे लगाकर उपचार किया जाए, और लोगों को बीमारियों केे प्रकोप से बचाया जाए।
फोटो परिचय- कलेक्टेªट परिसर में धरना सभा करते भाकियू के कार्यकर्ता
फोटो नंबर- 3
जन्म से पहले कन्या भ्रूण लिंग परीक्षण अपराध- प्रदीप कुमार
0 बेटी बचाओ संगोष्ठी
उरई(जालौन। लिंग चयन के माध्यम से जन्म से पूर्व बहुत से परिवार लड़की के जन्म के लिए प्रयास करते है परिवार में जब एक शिशु का जन्म होने वाला होता है तो सबकी इच्छा पुत्र जन्म की रहती। लड़की चाहत में मां के पेट में पल रहे बच्चे का लिंग जानने का प्रयास किया जाता है और अगर लड़की होने पर उसे गर्भ में ही मार दिया जाता है। ऐसी बहुत सी कन्या शिशु है जिन्हे जन्म से महरूम रखा जाता यह खतरनाक आपराधिक प्रवृत्ति है इससे सभी को बचना होगा तभी बेटी बचाओ अभियान को आगे बढाया जा सकेगा।यह बात दीवानी न्यायालय सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्ववाधान में आयोजित बेटी बचाओ संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश प्रदीप कुमार कंसल ने कही।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश ने कहा कि हम जन्म से पहले लड़कियों से किस तरह का भेदभाव कर रहे है यह भारत की जनगणना 2011 के आंकड़ों से देखा जा सकता है उत्तर प्रदेश में एक हजार लड़कों पर 101 लड़कियों की कमी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक कुमार ने कहा कि गर्भ में पल रहे प्रत्येक कन्या शिशु को जन्म देने का अधिकार है जन्म के पूर्व गर्भपात नैतिक, सामाजिक धर्म है और कानून रूप से अवैध है। इस कुरीति की रोकथाम हेतु बेटी बचाओ बेटी पढाओ नामक योजना पूरे देश में लागू की गई। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने लिंग चयन परीक्षण व अल्ट्रासाउंड सेंटर की वैधानिकता की जानकारी दी। डा. कल्पना ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के महत्व पर प्रकाश डाला। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामअचल यादव ने बालिकाओं के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। गोष्ठी को डा. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव ब्रजबिहारी गुप्ता ने भी संबोधित किया। सिविल जज सीडि अलका भारतीय ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अपर जिला जज श्रीनाथ सिंह, ऐके उपाध्याय, संजय कुमार सिंह, मनोज कुमार शुक्ला, नरेन्द्र कुमार, दिनेश तिवारी सिविल जज जूडि, मनोज कुमार जाटव, न्यायिक मजिस्टेªट विवेक विक्रम, जिला कार्यक्रम अधिकारी कमलेश मौर्या, तहसीलदार सदर बीके राय, सह परिवीक्षाधिकारी, श्रीमती संध्या झा, बाल संरक्षण अधिकारी जूली खातून, वरिष्ठ अधिवक्ता यूसुफ इश्तियाक, रमाकांत द्विवेदी, शिवकुमार त्रिपाठी, राजकुमारी निषाद आदि लोग मौजूद रहे।

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