cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce1.pngउरई। सरकारी अस्पतालों में मरीजो के लिए किये गये इंतजामों को केवल कागजों में देखें तो स्वास्थ्य और चिकित्सा के मोर्चे पर सूबे में रामराज्य की स्थिति दिखाई देती है लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही हैं। वरना सरकारी अस्पतालों की तस्वीर लोगों की निगाह में नरक से भी ज्यादा भयानक न होती। इस कारण सरकारी अस्पतालों का चेहरा संवारने की फिक्र अब राज्य सरकार को करनी पड़ी है। प्रदेश के सभी जिलों की तरह जालौन जिले में भी क्वालिटी काॅउंसलर की तैनाती कर दी गई जो कि पहले चरण मे जनपद के दस अस्पतालों का कायाकल्प कराने का जिम्मा संभालेंगे।
लगभग तीन महीने पहले इस पद पर पदस्थ किये गये डाॅ. अरुण राजपूत के बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. अशोक कुमार ने बताया कि कायाकल्प के तहत उन्हें जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंच, कालपी, रामपुरा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डकोर, कुठौंद, छिरिया सलेमपुर, बाबई व पिण्डारी का जिम्मा सौंपा गया है। उनके निर्देशन में वे इन अस्पतालों का सघन सर्वेक्षण कर रहे है। इसके तहत जिन बिंदुओं पर उन्हें अपनी रिपोर्ट देनी हैं उनमें मुख्यरूप से अस्पतालों में साफ-सफाई की स्थिति, मरीजों के साथ डाॅ. और स्टाॅफ का व्यवहार, डाॅक्टर व पैरा मेडिकल स्टाॅफ की समय पर सुलभता और अस्पताल के मेडि कचरे का प्रबंधन शामिल हैं।
डाॅ. अशोक कुमार ने कहा कि क्वालिटी काउंसलर को स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर तक जिले की 392 सरकारी मेडिकल यूनिटों को इस तरह सुसज्जित और व्यवस्थित करने में सहयोग देना है जिससे मरीज पूरी तरह संतुष्ट हो सके। मकसद यह है कि जनमानस में सरकारी अस्पताल की तस्वीर किसी बड़े से बड़े निजी नर्सिंग होम से ज्यादा उजली नजर आये।

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