03-meghnad-ko-agya-deta-rawan 04-ram-vilaap-karte-huyeजालौन-उरई। रामलीला महोत्सव 2016 के 13वें दिन लक्ष्मण शक्ति व कालनेम की माया का मंचन किया गया। जिसमें हनुमान-मेघनाद संवाद, लक्ष्मण मेघनाद संवाद के अलावा कालनेम की माया का दृश्य विशेष आकर्षण युक्त रहा।
रामलीला महोत्सव 2016 का मंचन नगर के गोविंदेश्वर मंदिर के पास किया जा रहा है। जिसमें १३वें दिन लक्ष्मण शक्ति, काजनेम की माया, भरत-हनुमान संवाद, मेघनाद हनुमान संवाद के अलावा बाल लक्ष्मण व हनुमान संवाद विशेष सराहनीय रहे। मंचन के प्रथम दृश्य में श्रीराम द्वारा लंका पर आक्रमण किए जाने की योजना बनाई गई। सभी वानरों ने लंका को चारों ओर से घेर लिया तभी रावण की आज्ञानुसार मेघनाद युद्ध करने के लिए आया। सर्वप्रथम उसकी मुलाकात हनुमान जी से होती है जहाँ दोनों के बीच जमकर संवाद होता है। बाद में लक्ष्मण के आने के बाद मेघनाद व लक्ष्मण संवाद प्रारंभ हो जाता है। दोनों के संवादों का बैठे दर्शकों ने अनंद लिया तथा तालियाँ बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन भी किया। अंत में मेघनाद, लक्ष्मण पर ब्रहमास्त्र का प्रयोग करता है। जिसके फलस्वरूप लक्ष्मण मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं। हनुमान जी उन्हें वहाँ से उठाकर रामदल में ले आते हैं। जहाँ प्रभु राम लक्ष्मणजी की हालत को देखकर बिलख-बिलख कर रो पड़ते हैं। रामजी का विलाप सुनकर दर्शक भी अपने आँसू नहीं रोक सके। इसी बीच जामवंत द्वारा लंका से सुखेन वैद्य को लाने की बात कही जाती है। जिस पर हनुमानजी लंका जाकर सुखेन वैद्य को ले आते हैं। सुखेन वैद्य संजीवनी बूटी द्वारा ही लक्ष्मणजी के उपचार करने की युक्ति बताने के साथ ही कहते हैं यदि सूर्याेदय से पूर्व संजीवनी बूटी नहीं आई तो लक्ष्मणजी के प्राण बचाना असंभव होगा। उसी समय तत्काल हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए चले जाते हैं। रास्ते में कालनेम नामक अपनी तमाम माया फैलाकर राक्षस हनुमान जी का रास्ता रोकने का प्रयास करता है। वहीं कालनेम स्वयं एक साधु का रूप धारण कर हनुमान जी से गुरूमंत्र लिए जाने को कहता है। तभी तालाब में स्नान करने गए हनुमानजी को एक मछली कालनेम की माया के बारे में बता देती है। तब हनुमान जी कालनेम की माया को समाप्त करते हैं। और सुखेन वैद्य द्वारा बताए गए पर्वत पर संजीवनी बूटी लाने के लिए पहुंचते हैं। परंतु जब वह पर्वत पर विविध प्रकार की बूटियों में संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाते हैं तो वह पूरा पर्वत लेकर रामदल की ओर चल देते हैं। वहीं बीच में जब हनुमान जी पर्वत लेकर अयोध्या के ऊपर से गुजरते हैं तो भरत ने उन्हें कोई राक्षस समझकर एक ही वाण से घायलकर जमीन पर गिरा दिया। अंत में हनुमान जी भरत को पूरी कथा बताकर रामदल पहुंचते हैं। जहां सुखेन वैद्य संजीवनी बूटी से लक्ष्मण का उपचार करते हैं। राम की सुंदर भूमिका में रामकेश पाठक खकसीस, लक्ष्मण केके शुक्ला, हनुमान की डॉ. राधेश्याम, मेघनाद की दिगम्बर तिवारी उरई, विभीषण की सुरेंद्र पाराशर सिकरी राजा, सुखेन वैद्य रमेश दुबे तथा कालनेम की भूमिका रामशरन शर्मा ने निभाई। तो वहीं विदूषक की भूमिका में सुभाष मस्ताना तथा महिला नृत्यकार के रूप में गुंजा रानी लखनऊ ने रावण के दरबार में अप्सरा के नृत्य के रूप में दर्शकों का मन मोह लिया।

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