उरई। बड़े नोट अचानक रदद किये जाने से जनजीवन को उत्पन्न कठिनाइयों के निराकरण के लिए सरकार द्वारा किये गये इंतजाम बैंकर्स ने सीना ठोक कर फेल कर दिये। सहकारी बैंकें जो कि अब वेतन भत्ते में राष्ट्रीकृत बैंको से होड़ करने लगी हैं। उनमें तो अपने ग्राहकों की इतनी बेइज्जती की गई कि खाता खोलने वाले पछता उठे।
सिरसाकलार में सहकारी बैंक ने शुक्रवार को नोट एक्सचेंज करने से मना करके ग्राहकों को दुत्कार कर लौटा दिया। यही नही मनमानी की इंतहा करते हुए बैंक प्रबंधक ने ग्राहकों से कहा कि वे सरकार के नही अपने बोर्ड के कर्मचारी हैं। बोर्ड ने उन्हें अतिरिक्त समय तक बैंक खोलने और पुराने रुपये जमा करने का कोई आदेश नही भेजा है इसलिए लोग दूसरी बैंकों का रास्ता देखें।
उधर जेडीसी की प्रधान शाखा में लेनदेन 4 बजे ही बंद हो गया। प्रबंधक का कहना था कि उनके पास रात 8 बजे तक बैंक खोलने का कोई आदेश नही है। इसके अलावा उन्हें स्टेट बैंक से सीमित करेंसी मिली है जो समय पूरा होने के पहले ही खत्म हो गई। अब वे शाखा खोलकर क्या करेंगे।
जेडीसी बैंक की सांध्यकालीन शाखा में लोग रुपये जमा करने के लिए लाइन में लगे रहे लेकिन उनकी बारी नही आई। बैंक मैनेजर धर्मपाल सिंह अपने कक्ष में संदिग्ध लोगों को वीआईपी ट्रीट करते हुए उनके लेनदेन को बिना लाइन के सुलटाने में व्यस्त थे। जिसकी वजह से स्टाॅफ भी क्यू के मुताबिक काम नही कर पा रहा था। लाइन में लगे कुछ लोगों ने आपत्ति की तो मैनेजर धर्मपाल सिंह ने अपनी जाति की दुहाई देते हुए उन्हें यहीं सबक सिखा देने की धमकी दे डाली जिससे ग्राहक सहम गये।






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