12orai05उरई। माधौगढ़ में स्टेट बैंक पर नोट जमा कराने और बदलने के लिए उमड़ी भीड़ बेकाबू हो गई जिसके बाद पुलिस ने आपा खो दिया और जमकर लोगों पर लाठियां चलाई जिनमें महिलाओं तक को नही बख्शा गया।
नोटों के मामले में सरकार की प्रयोग धर्मिता बैंकों की व्यवस्था पर भारी पड़ गई है। साथ-साथ कानून व्यवस्था के लिए भी संकट की स्थिति पैदा होने लगी है। रातों-रात पांच सौ, हजार के नोट रदद करने का फरमान जारी करके सरकार ने अर्थव्यवस्था का पहिया एकदम जाम कर दिया। हाहाकार मचने पर सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए जल्दबाजी में किये गये इंतजामों का खोखलापन सामने आया। न तो बैंकों को पर्याप्त नये नोट उपलब्ध कराये जा सके थे न ही एटीएम मशीनों को सही तरीके से भरा जा सका था। उस पर सरकार और प्रबंधन का कोई अनुशासन न होने की वजह से आपात परिस्थिति में भी बैंक अधिकारी और कर्मचारी अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाने के फरमान को धता बताने पर आमादा थे।
इसलिए बैंकों में अराजकता का माहौल पैदा हो गया। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया की माधौगढ़ शाखा के बाहर बैंक स्टाॅफ की सुस्त गति के कारण टूट कर उमड़ी जरूरतमंदों की भीड़ ने सब्र खो दिया। उपद्रव की आशंका बनने पर पुलिस हरकत में आ गई और इसके नतीजे में उसने भीड़ पर लाठियां बरसा डाली जिसमें महिलाएं भी चपेट में आ गईं। बाद में किसी तरह स्थिति पर काबू पाया जा सका।
उधर बैकों के एटीएम में दो हजार रुपये के नोट नही पड़ पा रहे जिससे ज्यादातर एटीएम के सामने से भीड़ को वापस जाना पड़ा। एक्सिस बैंक और एचडीएफसी के एटीएम से पैसा निकल रहा था इसलिए इन बैंकों के एटीएम पर मारामारी की स्थिति थी। जिला मुख्यालय की भी कई बैंक शाखाओं में उपद्रव जैसी स्थिति बनी और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। जिसमें महिलाएं भी लाठियां खाने से नही बच सकीं। सिरसाकलार में इलाहाबाद बैंक की शाखा 4 बजे ही बंद कर दी गई और 8 बजे तक बैंक खोलने पर जोर दे रहे अधीर ग्राहकों को अभद्रता करके भगा दिया गया। जिससे जनजीवन में बेहद असंतोष रहा।

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