
उरई | जिलाधिकारी नरेन्द्र शंकर पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई जिसमें , डा0 राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना, मनरेगा तथा जन सुविधा केन्द्र और तहसील दिवस में प्राप्त होने वाली शिकायतो के निस्तारण की स्थिति का जायजा उन्होने लिया । उन्होने निर्देशित किया कि विकास कार्यों से सम्बन्धित लम्बित कार्यों को गुणवत्तापूर्वक अतिशीघ्र पूर्ण किया जाये। कार्यों में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाये। जन शिकायतें प्राप्त होने के 24 घण्टे के अन्दर ही उस पर प्रभावी कार्यवाही हो,जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी स्वयं शिकायत कर्ता से सम्पर्क कर शिकायतों को निपटाये।
जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और पंचायत राज के अधिकारी के स्थान पर उनके बाबू को मीटिंग में भेज जाने और आईटीआई के प्रधानाचार्य के स्थान पर उनके मातहत के उपस्थित होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि वह घोर लापरवाही व निंदनीय स्थिति है। अनुपस्थित तीनो अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया जाये तथा स्पष्टीकरण मांगा जाये। स्पष्टीकरण संतोषजनक न पाये जाने की स्थिति में दण्डात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाये।
उन्होंने निर्माण एजेन्सियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि चाहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण हो, विद्यालय निर्माण कार्य हो अथवा जिले की सड़को का निर्माण हो ,गुणवत्ता परक, समय परक पारदर्शी तरीके से किया जाये। कार्यों में शिथिलता/लापरवाही पाये जाने पर दंडात्मक कार्यवाही हेतु तैयार रहें। कार्यदायी संस्थायें यदि भ्रामक रिपोर्टिंग करती है अथवा कार्य असंतोषजनक पाया जाता है तो कानूनी कार्यवाही के लिये तैयार रहे।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी एस पी सिंह और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ कल्पना बरतारिया सहित जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहें।







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