उरई। जिले में पुलिस की अनसुनी संगीन मामलों तक में नहीं टूटती। आठ महीने पहले हुई हत्या के मामले में विधवा जब पुलिस अधिकारियों की चौखट पर उंगलियां रगड़ते-रंगड़ते थक गईं तो उसने मजबूर होकर जिलाधिकारी के दर पर गुहार लगाई। उसका यह प्रयास सार्थक रहा। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अब जिले के पुलिस अधिकारियों की तंद्रा टूटी है। एसपी द्वारा दिये गये निर्देश के बाद पीडि़त महिला को भी कुछ होने की उम्मीद बंध गई है।जनपद में पुलिस व्यवस्था चरमरा चुकी है। वजह है कि बड़े से बड़े केस थानों से सुुविधा शुल्क लेकर दफन कर दिये जाते हैं। थाने कोतलवाली इसलिए बेखौफ है कि मातहतों को मालूम है कि शिकायत होगी तो उनके साहबान कार्रवाई करने की बजाय दरखास्त रद्दी की टोकरी के हवाले कर देंगें।
शायद गत वर्ष 30 नवम्बर को कोंच कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत काशीराम कालौनी निवासी पप्पू बाबा पुत्र कढोरे की हुई हत्या के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पप्पू बाबा की पत्नी संगीता ने बताया कि उक्त मामले में उसने पुलिस को नलकूप ऑपरेटर बृजमोहन कुशवाहा बब्लू बारी और आबिद के खिलाफ तहरीर दी थी। लेकिन आज तक उनकों नामजद नहीं किया गया है। कार्रवाई न होने के बजह से आरोपी उसे गम्भीर परिणाम की धमकियां दे रहे हैं।
डीएम ने इस प्रार्थना पत्र को संज्ञान में लेते हुए एसपी को फौरन कार्रवाई के लिए लिखा। नतीजतन अभी तक संवेदनहीनता बरत रही पुलिस अब हरकत में आती नजर आने लगी है।







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