कोंच-उरई । श्री नवलकिशोर रामलीला समिति के तत्वाधान में बीती रात रामलीला रंगमंच पर धनुर्भङ्ग लीला का मनमोहक मंचन हुआ जिसमें राजा जनक सीता स्वयंवर का आयोजन कर घोषणा करते हैं कि जो भी शिव धनुष पिनाक तोड़ेगा उसी के साथ जनकनंदिनी सीता का विवाह होगा। समूचे विश्व में राजा की यह घोषणा प्रसारित कर दी जाती है और सीता को वरण करने के लिये देश देशांतर के राजा, भूपाल तो आते ही हैं, देवता, नाग, गंधर्व, किन्नर आदि भी राजाओं के वेश में जनकपुर की रंगशाला में पधारते हैं और धनुष उठाने के प्रयास करते हैं लेकिन वे उसे हिला भी न सके। जब विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम उसे उठा कर खंड खंड कर देते हैं,सखियों के संग आकर जानकी सीता ने राम के गले में जयमाला पहना कर उनका वरण कर लिया।

 

रावण और वाणासुर भी रंगभूमि में प्रवेश करते हैं और उनके बीच गर्मागर्म वाक्युद्घ का दर्शकों ने खूब आनंद उठाया और तालियां पीटीं। बिदूषक दूल्हे के रूप में उल्टी खाट पर बारात लेकर आये विनोद राही ने नाऊ कक्का विश्वंभरदयाल स्वर्णकार के साथ मिल कर घंटे भर दर्शकों का खूब मनोरंजन कराया। धनुष की प्रलयंकारी ध्वनि सुन कर भगवान परशुराम का वहां प्रवेश होता है, क्रोधावेग में उनकी लक्ष्मण के साथ गर्मागर्म वार्ता का भी दर्शकों ने आनंद लिया। जनक की भूमिका रमेश तिवारी, विश्वामित्र पंकज वाजपेयी, विमति नेमिचंद्र अग्रवाल, सुमति की अनिल अग्रवाल, रावण रूपेश स्वर्णकार, वाणासुर शिवाकांत तिवारी, परशुराम मुन्ना पटैरया, सुनयना सूरज शर्मा, चतुर सखी राजेन्द्र बेधड़क ने निभाई। अभिनय विभाग के संयोजक चंदनसिंह यादव ने बताया कल 28 अक्टूवर को रात्रि ठीक आठ बजे राम वनवास लीला का मंचन किया जायेगा।

 

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