कुठौंद(उरई )। अध्यापकों के विद्यालय से गायब रहने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। देर से आना और जल्दी चले जाने के अध्यापकों के रवैये के कारण बच्चों ने भी विद्यालय जाना लगभग बंद कर दिया है।

कुठौंद ब्लाक क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊमरी मसगांव के विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से है। यहां कहने को तो प्राथमिक विद्यालय एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय है लेकिन पढ़ाई का स्तर बिल्कुल जीरो बना हुआ है। ग्राम प्रधान नीरज या उनकी पत्नी पिछले दस सालों से काबिज है फिर भी शिक्षा के स्तर में कोई सुधार नही हुआ है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ऊषा शुक्ला एवं सहायक अध्यापक मोनिका कार्यरत है। यहां तीनों कक्षाओं 6, 7, एवं 8 में 34 बच्चे है लेकिन कभी भी आधा दर्जन से अधिक बच्चे विद्यालय में नही देखे जा सकते। अभिभावकों का आरोप है कि अध्यापकों के समय से न आने और अध्यापन में रूचि न लेने के कारण उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है। ऐसा ही हाल प्राथमिक विद्यालय का भी रहता है जहां 10 बजे के पहले कोई अध्यापक स्कूल नही पहुंचता।  अध्यापकों का स्कूलों ज्यादातर गायब रहने के कारण यहां शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है। अभिभावकों के द्वारा अनेकों बार शिक्षा अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है लेकिन क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी भी विद्यालय के निरीक्षण की जहमत नही उठा पाते है जिसके कारण अध्यापक अपनी मर्जी के मालिक बने हुए है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कार्यवाही की मांग की।

 

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