
कोंच-उरई । जैसे जैसे नामांकन की अंतिम तिथि की उल्टी गिनती खत्म होने को है, नामांकन का सिलसिला भी तेज हो गया है। आज नामांकन के सातवें दिन कोंच पालिकाध्यक्ष पद के लिये जहां 8 लोगों ने अपने नामांकन भरे वहीं नदीगांव नपं अध्यक्ष पद पर भी 4 नामांकन दाखिल हुये हैं। कोंच पालिका में सभासदी के विभिन्न वार्डों में 51 नामांकन पत्र दाखिल किये गये जबकि नदीगांव नपं में सभासदी के केवल 4 पर्चे भरे गये। आज कई दलों ने मुहूर्त के हिसाब से चुपके चुपके नामांकन पत्रों के एक एक सैट दाखिल कर दिये जबकि कल और परसों में धूम धड़ाके के साथ नामांकन करने की योजना है।
निकाय चुनाव की जारी नामांकन प्रक्रिया के सातवें दिन नामांकन दाखिल करने का सिलसिला पिछले दिनों की वनिस्वत तेजी पकड़ा है। कोंच पालिका तथा नदीगांव नपं में अध्यक्ष पद के लिये आज केवल एक-एक नामांकन पत्रों की बिक्री हुई। इसके इतर सभासदी में कोंच नपा में 21 तथा नदीगांव नपं में 5 नामांकन पत्रों की बिक्री हुई। कोंच पालिकाध्यक्ष पद के लिये आज आरओ विनोदकुमार तथा एआरओ द्वय राकेश वर्मा व रामगोपाल वर्मा के समक्ष 8 लोगों अवधविहारी बाल्मीकि, संतोष वर्मा, पूनम देवी, नंदकिशोर, लाखनसिंह, अनिल वर्मा, जितेन्द्र राय तथा पारस वर्मा ने नामांकन दाखिल किये। इनमें पारस वर्मा सपा के और जितेन्द्र राय बसपा के अधिकृत प्रत्याशी हैं। नदीगांव में अध्यक्ष पद के लिये आरओ हरदेवप्रसाद तथा एआरओ द्वय कमलेश मिश्रा व आनंद भूषण के समक्ष 4 लोगों भानुप्रकाश व हरीमोहन जो आपस में सगे भाई हैं, ने पर्चे भरे। इसके अलावा दशरथ व चंद्रप्रकाश ने भी पर्चे भरे, ये दोनों भी आपस में सगे भाई हैं। हालांकि आज अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों ने सामान्य तरीके से अपने नामांकन के एक एक सैट दाखिल किये हैं लेकिन सभासदी के उम्मीदवारों ने पूरे ताम झाम के साथ समर्थकों की भारी भीड़ के साथ नामांकन स्थल पर पहुंच कर अपने नामांकन भरे।
मुश्किलें बढायेंगे विद्रोही प्रत्याशी
आज जो नामांकन दाखिल किये गये हैं वे कमोवेश दलीय प्रत्याशियों की नींद उड़ाने के लिये काफी हैं। सपा के अधिकृत प्रत्याशी पारस वर्मा ने तो आज पर्चा दाखिल किया ही है, अनिल वर्मा ने भी अपना नामांकन भर दिया है। अनिल ने सपा का टिकिट मांगा था और पैनल में नाम भी था लेकिन सपा आलाकमान ने उनकी दावेदारी दरकिनार करके जब पारस को प्रत्याशी बनाया तो ये बतौर विद्राही सपाई मैदान में सपा प्रत्याशी की मुश्किलें बढा रहे हैं। इसी तरह अवधविहारी बाल्मीकि को भी विद्रोही भाजपाई माना जा रहा है क्योंकि उनका नाम टिकिट दावेदारों की फेहरिश्त में था लेकिन टिकिट प्रेमनारायण वर्मा की झोली में जाने के बाद अवधविहारी विद्रोह पर उतरे हैं। भाजपा के लिये चौंकाने बाली खबर यह भी है कि जिन नरेश वर्मा को टिकिट मिलने की पूरी उम्मीद समूची भाजपा कर रही थी उन नरेश वर्मा ने अध्यक्षी का पर्चा खरीद कर सभी को खासतौर पर भाजपा को तो चौंका ही दिया है।
वोट बनने के लिये अभी भी लग रही है भीड़
एक तरफ नामांकन का समय खत्म होने को है लेकिन दूसरी तरफ सैकड़ों की संख्या ऐसे लोगों की है जिनके नाम ही मतदाता सूचियों से गायब हैं। ऐसे लोगों की भीड़ आजकल तहसील में देखी जा रही है। ऐसे लोगों को समय निकल जाने के कारण अब मायूसी हाथ लग रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने तहसील प्रशासन को पत्र भेज कर साफतौर पर जता दिया है कि चूंकि परिबद्र्घन, संशोधन और विलोपन की अंतिम तिथि 28 अक्टूवर थी, उस तिथि तक जितने भी आवेदन प्राप्त हुये हों उन्हें 3 नबंवर तक जिला निर्वाचन कार्यालय में उपलब्ध करा दिया जाये। इन आदेशों की रोशनी में तहसील प्रशासन ने नये बढने बाले वोटों को बढाने से अपने हाथ खड़े कर दिये हैं और वोटर मायूस होकर घर लौट गये।







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