0 जिले में कुल 140 चारागाह चिन्हित
0 100 चाराागाहों की भूमि ऊंची नीची तंग गलियों की है जो अनुपयुक्त
0 40 चारागाह चार लाख गौवंश के लिए है
0 अजनारा, बोहदपुरा, इमिलिया व कालपी की गौशालायें नाकाफी
0 किसानों की खड़ी फसले रात में चर रही है गाये
उरई। बुंदेलखंड में गायों की अन्ना प्रथा ने किसानों की नाक में दम कर दिया है। रात-रात भर किसान हलकारा लगाकर गायों को भगा रहे है। फिर भी हजारों किसानों की मटर, मसूर, की खेती को चर कर चैपट कर रही है। सरकारी प्रयास भी नाकाफी है। अभी तो गौशालायें बनाने की सिर्फ और सिर्फ कागजी योजनाएं ही बन रही है धरातल पर कुछ भी नही है। जब योजनाएं मूर्तरूप लेगी जब तक यहां के खेत खाली हो जाएगे। गौवंश प्रथा पर नियंत्रण के लिए तत्कालिक योजना के नाम पर अभी ऐसा कुछ खास दिख नही रहा है।
वैसे तो राजस्व विभाग के रिकार्ड में जिले में 140 गऊचर चारागाह चिन्हित है जिनमें 100 चारागाहों की भूमि में ऊंचे नीचे बड़े टीले तथा तंग गलियों की वजह वह किसी काम में ही नही है। बचे 40 चारागाहों में से 30 चारागाहों पर प्रशासन ने मनरेगा से काम शुरू कराया है। जबकि छह चारागाह तो ऐसे है जिन पर गांवों के गरीब गुरबों ने अपने कच्चे पक्के मकान भी बनवा लिये है।
हकीकत देखी जाये तो जनपद का कोई इलाका ऐसा नही है। जहां के किसानों के खेतों में बोई चना, मटर, मसूर की खड़ी फसले रात में यह गाये चट न रही है। किसान रात-रात भर जाग कर हलकारा लगाकर गायों को इधर से उधर भगाने का काम कर रहे है। गौरतलब हो कि बीते डेढ माह पहले सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा पर नियंत्रण के लिए 40 करोड़ अपने खर्च करने का एलान किया था। लेकिन पता नही वह पैसा कहा अटका हुआ है। वैसे जनपद में पांच गौशालाएं पशुपालन विभाग में पंजीकृत है। इमिलिया खुर्द, कालपी में 175 गाय, श्री गोपाल गौशाला भोजापुर में, 110 गाये ऋषि कृषि गौ सेवा संरक्षण संबंधित केन्द्र उमरारखेरा, जालौन गौशाला समिति कालपी, भैरव गौ सेवा समिति पाल मड़ैया, तीन और नही गौशालाएं शासन को पंजीकरण के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरपीएस सिंह ने शासन को भेजी है। इसके अलावा बोहदपुरा व अजनारा के गौ आश्रम केन्द्रों में करीब 700 गाये है। लेकिन उनको चारा भूसा की व्यवस्था न होने की वजह से गाये दमतोड़ रही है। बाबा गौदास भी बताते है कि प्रशासन का उन्हें अपेक्षित सहयोग नही मिल रहा है।
का वर्षा जब कृषि सुखाने
सरकार की योजनाएं मूर्ति रूप तब लेती है जब उस योजना का कोई औचित्य ही न रह जाए किसान अपनी फसलों की रक्षा के लिए फिल वक्त इस समय हैरान है। लेकिन गौ संरक्षण बन बिहार की सवा सौ एकड़ में बनने वाली इस योजना के लिए मुहाना जंगल में जमीन चिन्हित की गयी है। लेकिन चयन प्रक्रिया मार्च तक पूरी होगी। फिर अप्रैल में दस करोड़ का वजट मिल पायेगा। जिसमें हजारों गायों का संग्रह स्थल बन सकेगा। तात्कालिक तौर पर अन्ना गायों की प्रशासन के पास कोई व्यवस्था ही नही दिख रही है।
अजनारा गौशाला के लिए भूसा भेजा
मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह व मुख्य पशुधन विकास अधिकारी ने बताया कि मनरेगा मद से सवा दौ सौ कुंटल भूसा बोहदपुरा व अजनारा की गौशालाओं के लिए आज ही भूसा रिलीज कर दिया गया है। यदि और जरूरत होगी तो जरूर दिया जाएगा।
किसानों के प्रति लापरवाह सरकार
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष राजवीर सिंह जालौन कहते है कि यह सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह से लापरवाह है। किसानों की हजारों एकड़ फसले अन्ना जानवरों ने चर ली। तात्कालिक रूप से इस दैवीय आपदा के लिए प्रशासन के पास कोई भी कार्य योजना नही है। यदि प्रशासन ने ध्यान न दिया तो गांवों खेतों से जानवरों को ले जाकर अब अफसरों के आवासों पर ही यह जानवर छोड़ कर आयेगे।






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