उरई। समाज के कल्याण के लिए कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करने वाले समाज कल्याण विभाग मंे कर्मचारियों के टोटे ने विभागीय योजनाओं की रफ्तार थाम दी है। हालत यह है कि बड़े पैमाने पर यहां कर्मचारियों के पद रिक्त होने चले जा रहे है लेकिन उनकी पूर्ति के लिए शासन कतई गंभीर नही दिख रहा है।

जनपद में कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करने वाले समाज कल्याण विभाग में कर्मचारियों के टोटे के कारण दूरदराज से आने वाले आम आदमी को अपनी समस्या का हल नही मिल पाता है। समय एवं पैसा खर्च करके आने वाले लोगों की समस्या का निराकरण भी नही हो पाता है जिला समाज कल्याण विभाग में चार सुपरवाइजर के पद है जिसमें तीन पद रिक्त चल रहे है। केवल एक सुपरवाइजर कार्यरत है। सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण के नौ पद है जिसमें चार कार्यरत है। इन चार में भी वर्ष 2018 में तीन सहायक विकास अधिकारी सेवानिवृत होने जा रहे है। समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के तीन पद है जिसमें दो कार्यरत है एक पद खाली चल रहा है। वरिष्ठ लिपिक के दो पद है। जिसमें एक ही कार्यरत है लेखाकार का एक पद है जो रिक्त चल रहा है।

सवाल उठता है कि वृद्धावस्था पेशन, शादी, बीमारी अनुदान के अलावा तमाम कल्याणकारी योजनाओं का संचालन कैसा हो रहा होगा गनीमत है कि योगी सरकार ने राज्यस्तरीय पेंशन योजना खत्म कर दी, समाजवादी पेंशन योजना खत्म होने की जानकारी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नही है। ऐसे लोग बड़ी संख्या में कार्यालय के चक्कर लगा रहे है जो भोजनाएं यहां संचालित है उनका प्रभावी कियान्वयन भी नही हो पा रहा है। यही हाल कदौरा के बबीना में आश्रम पद्धति के स्कूल का है। यहां विद्यालय के अधीक्षक का पद शुरू से ही खाली चल रहा है। जिसके चलते शासन ने अधीक्षक की नियुक्ति के वजाय इस पद को मृत घोषित कर दिया। विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद भी खाली चल रहा है तो शिक्षकों के 15 पद स्वीकृत है। जिसमें दो शिक्षक ही विभाग के कार्यरत है 11 शिक्षक संविदा पर रखे गये इन अव्यवस्था के कारण विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह से चैपट है।

 

 

Leave a comment