
कालपी (उरई )। स्थानीय नगर के बड़े पीर साहब के आस्ताने मोहल्ला मिर्जा मंडी कालपी में मेले तथा फातिहा का कार्यक्रम परंपरागत तरीके से धूमधाम पूर्वक मनाया गया। जिसमें अकीदतमंदों तथा महिलाओं ने भारी संख्या में आस्ताने मे भागीदारी करके मन्नतें मानी एंव मुल्क तथा कौम की तरक्की तथा खुशहाली के लिये अल्लाह पाक से दुआएं मांगी। पर्व के अवसर पर खिदमते आलिया मे बाद नमाजे इशा विख्यात मदरसा दारुल उलूम गौसिया मजीदिया मे इस साल भी अजीमुश्शान गौशुलवरा कांन्फ्रेस का आयोजन सम्पन्न हुआ और कार्यक्रम देररात तक चलता रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये पीरे तरीकत रहबरे शरीअत हजरत सैय्यद शाह असलम मियां वामिकी सज्जादा (नशीन खानकाहे वामिकी बरेली) ने पीरान-ए-पीर बड़े पीर साहब की जीवनी एंव करामातों पर प्रकाश डाला। कान्फ्रेंस मे मुख्य अतिथि की हैसियत से पधारे खतीबे बा कमाल फातेह एशिया व यूरोप खतीबे आजम हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह राशिद मक्की मियां साहब किब्ला अशरफी (कछौछा शरीफ ) ने अपने सम्बोधन मे कहा कि हम सभी लोगों को बड़े पीर साहब के आदर्शों की नसीहत लें तथा उनके बताये हुये दीनी रास्ते पर चल कर नेक बने। मुफ्ती -ए-शहर मौलाना अशफाक अहमद बरकाती ने कान्फ्रेंस के माध्यम से बड़े पीर साहब, हिन्दल वली ख्वाजा गरीब नवाज हजरत मुईनुद्दीन चिश्ती रहमत उल्लाह अलैह अजमेरी सहित तमाम वलियों का जिक्र करते हुए बताया कि हिन्दुस्तान मे मूगल वादशाह रहे हजरत औरंगजेब सादगी एंव नेकी की मिसाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत जैसे विशाल देश के शहंशाह रहते हुए हजरत औरंगजेब ने अपने निजी तथा घर के खर्च के लिए सरकारी शाही खजाने से जीवन पर्यन्त एक राई रत्ती पैसे का उपयोग नहीं किया।वल्कि अपनी निजी मेहनत की कमाई से निजी तथा घर गृहस्थी का सादगी से खर्च चलते थे।इसलिये मेहनत मशक्कत की कमाई से सभी लोग अपनी जिन्दगी गुजारें।कार्यक्रम का संचालन बड़ी मस्जिद के इमाम हाफिज इरशाद अशरफी के द्वारा किया गया। शायरे इस्लाम शहन्शाहे तरन्नुम बुलबुले बागे मदीना हजरत शुऐब रजा कादरी भोपाली व कारी अब्दुल समी, हाजी मुजीब अल्लामा समेत उल्मा व शोअरा ने कार्यक्रम तकरीर पेश की।





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