कालपी (उरई )। हाड़ कपाऊ कड़कड़ाती भीषण सर्दी के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते कालपी शहर में अलावा पर्याप्त मात्रा में न जलने से गरीब तबके के बेेसहारा लोग तथा ठिलिया, रिक्शा चालक तथा आने जाने वाले बाजारू लोग थर-थर कांपने को विवश है।

प्रकृति के प्रकोप से इस समय सर्दी पूरे शबाब पर है कालपी नगर व क्षेत्र में भीषण सर्दी के कारण सुबह बर्फ की जहां चादर जम रही है वहीं पूरे दिन कोहरे युक्त गलन भरी सर्दी से आम जनमानस का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।

सर्दी के प्रचंड प्रकोप के बाद तथा शासन के स्पष्ट निर्देश के बाद भी कालपी प्रशासन के कानों में जूं तक नही रेंग रही है। शहर के मुख्य जगह फुलपावर चैराहा, टरननगंज चैराहा, कदौरा फाटक, दुर्गा देवी मंदिर, बड़ा बाजार, जुलौहटी, आलमपुर, खोवामंडी, गल्ला मंडी, आदि में अलाव न जलने से आम आदमी थर-थर कांपता हुआ प्रशासन को कोसता नजर आ रहा है। शहर में भले ही एक दो जगह पर अलाव जलाये जा रहे है कागजों और सोशल मीडिया पर अलाव की गर्मी प्रचंट हो रही हो लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नगर की मुख्य जगहों पर अलाव के नाम पर एक भी लकड़ी जनता को देखने को आज तक नही मिली है। जिसके कारण शहर का आम जनमानस गलनभरी सर्दी से थर-थर कांप रहा है।

बसपा के मिशनरी नेता मंुशी होरीलाल का कहना है कि वह ग्राम मैनूपुर से कालपी तहसील सुबह आकर शाम को वापस जाते है लेकिन समाजसेवा के बाद उन्हें भीषण सर्दी का प्रचंट प्रकोप झेलना पड़ रहा है। उन्हे कालपी में अलाव की गर्मी आज तक नसीब नही हुई। विद्वान अधिवक्ता कामरेड राजेन्द्र सिंह जादौन का कहना है कि अलाव कागजों और सोशणा मीडिया पर जमकर जल रहे है और उसकी गर्मी से आम जनमानस गर्माहट प्राप्त कर रहा है। शहर में जनता को अलाव की शायद आवश्यकता कम है इसलिए अलाव जलाने की मात्र औपचारिता पूर्ण की जा रही है। विवेक मिश्रा का कहना है कि वह प्रतिदिन सुबह कालपी आकर शाम को वापस जाते है और सर्दी ने उनका जीना मुहाल कर दिया है। अलाव के अभाव मेें वह बीमार होते जा रहे है तथा सर्दी से शहर में कई लोग बीमार हो रहे है। नगर की जनता ने जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर से मांग की है कि कालपी में कागजों की जगह जमीन पर अलाव जलवाये जाए जिससे गरीबों को सर्दी से राहत मिल सके।

 

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