
जालौन टाइम्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नामांकित पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का कार्यभार ग्रहण करना एक सप्ताह से अधिक समय से अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है। उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है जिसके कारण राज्य सरकार की बुरी किरकिरी हो रही है।
गत 31 दिसम्बर को तत्कालीन पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह के सेवा निवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने चार अफसरों को सुपरसीड कर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चल रहे ओपी सिंह को उनका उत्तराधिकारी बनाने का आदेश जारी किया था। जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं फैल गई थीं। फिर भी लोग उम्मीद कर रहे थे कि ओपी सिंह तत्काल केंद्र से कार्यमुक्त होकर 2 जनवरी तक प्रदेश के पुलिस महानिदेशक का कार्यभार संभाल लेगें। तब तक तत्कालीन पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने कानून व्यवस्था के अपर पुलिस महानिदेशक आनंद कुमार को अपना चार्ज सौंप दिया था।
पर ओपी सिंह के चार्ज संभालने की संभावित तिथि बढ़ती ही चली गई और फिर इसकी खबर आना भी बंद हो गई। यह कारण भी मीडिया में नही बताया जा रहा है कि ओपी सिंह किस वजह से केंद्र से कार्यमुक्त नही हो पा रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के टेकनपुर ग्वालियर स्थित सीमा सुरक्षा बल के आडिटोरियम में दो दिन का एक बड़ा पुलिस सम्मेलन भी हो चुका है। जिसमें सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों ने भाग लिया। यह सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण था। इसलिए सम्मेलन के पूर्व स्थाई पुलिस महानिदेशक को कार्यभार ग्रहण कर ही लेना चाहिए था। तांकि सम्मेलन में लिए गये फैसलों और बनाई गई रूपरेखा का वे बेहतर तरीके से पालन करा सकें। लेकिन यह उम्मीद अनिश्चितता की भेंट चढ़ गई। अभी भी ओपी सिंह के मामले को गोपनीय रखा जा रहा है।
इसी बीच सूत्रों ने बताया कि ओपी सिंह के मामले में इसलिए पेंच फंस गया है कि वे 1995 में हुए गेस्टहाउस कांड में आरोपित हैं और इसके आधार पर आईबी ने उनके खिलाफ लिखित रिपोर्ट दी है कि अगर उनको देश के सबसे बड़े सूबे के पुलिस मुखिया की कुर्सी सौंपी जाती है तो सत्तारूढ़ पार्टी को दलितों की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस रिपोर्ट की वजह से केंद्र सहम गया है और उसने उत्तर प्रदेश सरकार को ओपी सिंह के नाम पर पुनर्विचार करने का फरमान भेज दिया है। इसीलिए ओपी सिंह की ताजपोशी नही हो पा रही है और संभावना यह बन रही है कि प्रवीण सिंह जो कि प्रदेश काडर के मौजूद आईपीएस अधिकारियों में सीनियर मोस्ट हैं उन्ही को पुलिस महानिदेशक बना दिया जाये। हालांकि उनका कार्यकाल इसी वर्ष कुछ महीने बाद खत्म होने जा रहा है।






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