उरई। यहां भी बारह वर्षीया बालिका राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतिभा चुनी गई है तथा राष्ट्रीय सम्पदा बनने के मार्ग पर है। यह सूचना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत गठित संस्था सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक गिरीश जोशी ने बालिका के पिता प्रसन्न वेंकट को बधाई देते हुए दी।

उल्लेखनीय है कि उक्त केंद्र सीसीआरटी देश की सांस्कृतिक प्रतिभाओं एवं कलाओं की खोज करने तथा उन्हें प्रशिक्षित करने का कार्य करती है। वागीशा कुमद को यह नेशनल स्कालरशिप बुंदेलखंड के लोकनृत्यों में प्रशिक्षण देने के लिए प्रदान की गई है, जो उसकी 20 वर्ष की आयु तक सतत मूल्यांकन निगरानी एवं मार्गदर्शन में सफल होने पर जारी रहेगी। यह भी मालूम हो कि सीसीआरटी प्रति वर्ष 14 से कम उम्र के बच्चों की तीन स्तरीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता तथा प्रदर्शन देखने के बाद विशेषज्ञों के निर्णय पर उक्त स्कालरशिप प्रदान करती है। 1982 से लागू की गई योजना में अब तक संपूर्ण उत्तर प्रदेश में केवल 379 बच्चों को उक्त सम्मान दिया गया है तथा इस वर्ष जिन ग्यारह प्रतिभाओं को चुना गया है वागीशा कुमुद (चुनमुन) उनमें से एक है।

स्थानीय गुरुकुलम पब्लिक स्कूल के व्यवस्थापक सौरभ माहेश्वरी ने बताया कि उक्त बालिका उनके विद्यालय में सातवीं कक्षा की छात्रा है तथा इस विद्यालय के तथा जनपद के अन्य कार्यक्रमों में प्रथम पुरस्कृत होती रही है। उसके नेशनल स्कालर चुने जाने पर विद्यालय गर्व का अनुभव करता है तथा शीघ्र ही बालिका के सम्मान में विद्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किये जाने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि उक्त बच्ची को भी पारंपरिक अकादमिक शिक्षा के साथ बुंदेलखंड के पारंपरिक नृत्यों राई, बधाई, नौरता आदि के प्रशिक्षण की विद्यालय ने विशेष व्यवस्था की थी। इसके लिए सागर (म.प्र.) के प्रसिद्ध निदेशक सुधीर तिवारी, निशा तिवारी ने विशेष शिविर लगाकर राई का प्रदर्शन करने के लिए प्रशिक्षण दिया था। सीसीआरटी में साक्षात्कार के समय उसने राई का नृत्य प्रदर्शन करके सफलता प्राप्त की है।

मालूम हो कि सागर देश में प्रदर्शन कलाओं का सबसे बड़ा प्रशिक्षण नगर है। जहां सौ से अधिक संस्थाएं इस विरासत को संरक्षण करने में अपना योगदान दे रही हैं। भविष्य में भी विद्यालय सागर से प्रशिक्षक बुलाकर उक्त बालिका के साथ नगर की अन्य इच्छुक कला प्रतिभाओं को उक्त नृत्यों के शिविर में प्रशिक्षित करने में गर्व का अनुभव करेगी। इस संदर्भ में अभिभावक समय-समय पर संपर्क कर सकते हैं। नगर की अन्य प्रतिभाओं को शिविर में सम्मिलित होने के पूर्व प्रारम्भिक स्क्रीन टैस्ट देना होगा, उसके बाद ही उन्हें प्रशिक्षित किया जा सकता है।

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