उरई। शिवनाथ सिंह की दास्तान सतयुग की पुण्य गाथा सरीखी लगती है। गरीबी का दंश झेल रहे शिवनाथ को उनके गांव ऊमरी के बाशिंदों ने सन 60 में पंच परमेश्वर यानि प्रधान की कुर्सी पर बैठाया। तब गांव वालों ने उनसे कोई उम्मीद नही पाली थी, सिर्फ शिवनाथ की ईमानदारी को पुरस्कृत किया था। अलबत्ता शिवनाथ ने प्रतिदान में एक संकल्प लिया। उस जमाने के लिहाज से बड़ा संकल्प उन्होंने स्वयं और गांव वालों के जरिए इतना बड़ा पंचायत भवन बनवाया कि 80 वर्षीय पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रामकुमार दीवौलिया का दावा है कि पूरे एशिया में इतना बड़ा पंचायत भवन दूसरा कोई नही बना।
शिवनाथ ने जिस समय इतिहास रचा, ग्राम पंचायतों को कोई वित्तीय सहायता नही मिलती थी, ऐसे हालात में संकल्प पूरा करने के लिए शिवनाथ तथा ग्राम सभा के सभी 10 सदस्यों को कामकाज छोड़कर फाकाकशी तक करनी पड़ी थी। शिवनाथ जिस समय प्रधान चुने गये थे। उनके पास बमुश्किल 6 बीघा जमीन थी। लेकिन जिम्मेदारी सात बच्चों को पालने की थी। गरीबी के चलते तीन बेटों की असमय मृत्यु हो गयी लेकिन इस इम्तिहान के बावजूद शिवनाथ का ईमान नही डिगा। इसी का इनाम था कि गांव वालों ने बड़े आदमियों को दरकिनार करते हुए शिवनाथ को चार बार अपना मुखिया चुना। शिवनाथ सिंह ने भी गांव के लिए कुछ अनूठा करने का इरादा बनाते हुए ग्राम सभा की 9 एकड़ जमीन में पंचायत भवन बनाने का संकल्प लिया। चूंकि इतने बड़े भवन के लिए सरकार से धन आवंटित होना संभव नही था। लिहाजा उन्होंने क्षेत्रीय लोगों से निर्माण सामग्री के दान की मनुहार करते हुए गांव वालों को श्रमदान के लिए प्रेरित किया। शिवनाथ के विश्वास में इतना बल था कि तमाम लोग निर्माण सामग्री देने आ गये। लेकिन उन्होंने केवल जरूरत भर का सामान लिया और वायदा किया कि उनका परिवार खेती छोड़कर पंचायत भवन निर्माण में जुटा रहेगा। उनकी भावना देख गांव सभा का पूरा सदन प्रेरित हो गया। सदस्यों में धुन नामक राजगीर बगैर मेहनताना लिए काम करने के लिए आगे आया। सरमन सिंह सेंगर, आधार सिंह राजपूत, बरजोर सिंह, रामबिहारी तिवारी, श्याम लाल, ठकुरी काछी, बद्री यादव, विशाल सिंह, उमराव सिंह मुखिया, बाबू बाल्मीकि, विश्वनाथ सिंह सेंगर भी श्रमदान में आहूति देने खड़े हो गये। गांव वालों की लगन से अभिभूत रामपुरा के तत्कालीन राजा ने एक ब्रिटिश इंजीनियर से इसका नक्शा बनवाया और काम शुरू हो गया। गांव वालों ने खुद ईंटें पकाई और देखते-देखते विशाल पंचायत भवन खड़ा हो गया।

 

 


आज शिवनाथ सिंह के एक मात्र जीवित बचे पुत्र राजेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ जर्जर मकान में रहते हैं लेकिन पंचायत भवन की 14 कमरों की बुलंद इमारत देखकर उन्हें अपने पिता की नायाब सार्वजनिक विरासत पर नाज होता है। इमारत में 6 कमरे 20 गुणा 10 और 8 कमरे 10 गुणा 10 फिट के हैं। 30 गुणा 50 फिट का हाल भी है। 1975 में ऊमरी को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद पंचायत भवन में पुलिस चैकी स्थापित हुई। इससे पहले इसी भवन में लंबे समय तक आयुर्वेदिक अस्पताल चलता रहा था।
ऊमरी से तीन किलोमीटर दूर रामपुरा नगर पंचायत के चेयरमैन शैलेंद्र सिंह का कहना है कि भारत सरकार को यह भवन अधिग्रहीत कर इसे आदर्श पंचायती राज स्मारक का दर्जा देना चाहिए। जिससे अन्य प्रधानों द्वारा शिवनाथ सिंह का अनुकरण किया जा सके।

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