उरई। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के वित्तीय वर्ष 2016-17 के कार्यों का गांव-गांव में खुली बैठके आयोजित कर सोशल आडिट कराया जायेगा।
सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें आम तौर पर रहती हैं जिसमें उनका लाभ पात्र लोगों तक न पहुंचने देने व लाभार्थियों से सुविधा शुल्क की वसूली के आरोप मुख्य होते हैं। इस पर रोक के लिए सरकार ने खुली बैठकों मेें सोशल आडिट कराने की व्यवस्था लागू कर रखी है। बावजूद इसके शिकायतों की रोकथाम नही हो पा रही है।
मालूम रहे कि यह शिकायतें भी आम है कि सोशल आडिट के नाम पर दिखावा होता है। हर गांव के लिए जिला स्तरीय अधिकारी को पर्यवेक्षक बनाया जाता है लेकिन वे खुली बैठक के समय पहुंचते ही नही हैं। सोशल आडिट टीम का गठन गांव वालों के बीच में से ही किया जाता है। तांकि टीम को किसी तरह धोखा न दिया जा सके।
इस बार फिर यह प्रक्रिया दोहराई जा रही है। जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने आज अलग-अलग गांव में सोशल आडिट के लिए खुली बैठक की तिथि और किस गांव में किस जिला स्तरीय अधिकारी को पर्यवेक्षक बनाया गया है इसकी सूची जारी कर दी है।






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