उरई। महिला अस्पताल में तैनात डाक्टर के रवैये से मरीज आहत हो रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य और उपचार सेवाओं का संबंध लोगों की जिंदगी-मौत से होने के कारण सरकार डाक्टरों को लगातार हमदर्दी और संवेदनशीलता के साथ पेश आने की हिदायत देती रही है।
पीड़ित कैलाश याज्ञिक ने बताया कि शुक्रवार को वे अपनी बच्ची को दिखाने के लिए महिला अस्पताल में गये थे। उनकी बच्ची लगातार कमजोर हो रही थी जिसकी वजह से उसे जान जोखिम जान वे उसका वजन कराने और उपचार लेने के लिए बहू के साथ महिला अस्पताल पहुंचे। निक्की वार्ड में डाक्टर डीवी सिंह राजपूत की डयूटी थी। उन्होंने बच्ची को देखने और उसका वजन कराने की बजाय कैलाश याज्ञिक को गालियां देकर बाहर निकाल दिया। इस अपमान के कारण कैलाश याज्ञिक की खुद की तबियत भी बिगड़ गई और उन्हें एक प्राइवेट डाक्टर से उपचार कराना पड़ा। कैलाश ने शनिवार को इसे लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेज दी है।

Leave a comment