उरई। सरकार के नाकारापन के कारण अधिकारी बेखौफ होकर काम कर रहे हैं जिससे प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई नजर आ रही है। यहां तक कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी कोई पुरसा हाल नही है।
एक वर्ष पूरा हो जाने पर सरकार ने भले ही अपने मुंह मियां मिटठू बनते हुए खुद की उपलब्धियों का जोर-शोर से बखान किया हो लेकिन धरातल पर स्थिति एकदम विपरीत है। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में व्याप्त अराजकता के माहौल की खबरें कई बार उजागर की जा चुकी हैं लेकिन कोई एक्शन आज तक नही हुआ। जिससे स्कूलों की स्थिति दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है।
कोंच विकास खंड क्षेत्र के बिरगुवां बुजुर्ग गांव के प्राथमिक पाठशाल की स्थिति इसकी गवाही देती है। कहने को तो इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित चार शिक्षकों की तैनाती है। लेकिन एक भी दिन कोई शिक्षक टाइम से नही पहुंचता जिससे विद्यालय में ताला लटका रहता है। इस माहौल में बच्चों की लिखाई-पढ़ाई ठप्प हो चुकी है। वे बिना पढ़े-लिखे विद्यालय से लौटने को मजबूर हैं।
बिरगुवां बुजुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन का गृह ग्राम है। लेकिन निरंकुशता की स्थिति यह है कि इस गांव तक में शिक्षा व्यवस्था को चैपट करने से विभाग बाज नही आ रहा। जिसके कारण हर रोज देर से आने वाले अध्यापकों पर अभी तक कार्रवाई की नही सोची जा सकी है। जनपद के प्रशासनिक अधिकारी भी अकर्मण्यता और सुविधा भोगिता के आदी हो जाने के कारण किसी व्यवस्था को सुधारने के लिए अपने हाथ-पैर नही हिलाना चाहते। ऐसे में जनपद की हालत भगवान भरोसे हो गई है।

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