उरई। माधौगढ़ में आज जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस के दौरान अव्यवस्थाओं का आलम देखा गया। फरियादियों को जमीन पर बैठकर अपनी पीड़ा हाकिमों को बतानी पड़ी। 95 कुल आई शिकायतों में से मौके पर पांच का ही निस्तारण हो सका।
पीड़ित जनता को राहत के लिए शुरू की गई तहसील दिवस योजना वर्तमान शासन-प्रशासन की उपेक्षा की भेंट चढ़ रही है। आज माधौगढ़ में जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर की अध्यक्षता में मुख्य तहसील दिवस का आयोजन किया गया था जिसमें जनपद के सभी विभागाध्यक्ष शामिल थे। इसे लापरवाही माना जाये या हिमाकत कि इसके बावजूद आयोजन में गरिमा को कोई ख्याल नही रखा गया। फरियादियों को ससम्मान सुनने का मुख्यमंत्री का निर्देश उस समय ढकोसला साबित कर दिया गया जब कुर्सियों की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उन्हें जमीन पर बैठने को मजबूर किया गया। जबकि लोक सेवक कुर्सी पर पसरे हुए शंहशाहों की तरह उनकी अर्जी लेते देखे गये।
तहसील परिसर में फरियादियों की प्यास बुझाने के लिए इंतजाम दुरुस्त रखने पर कोई ध्यान नही दिया गया था। वाटर कूलर कई दिन से खराब था जिसे तहसील दिवस के समय ठीक कराने की जरूरत नही समझी गई। हैंडपंप के चारों तरफ इतनी गंदगी थी कि पानी पीने के लिए पहुंचने वाले को घिन आ जाये। प्रसाधन केंद्र के सामने जनरेटर रख दिया गया है जिससे लघुशंका या शौच निदान की कोई गुंजाइश फरियादियों के लिए नही रह गई थी।
तहसील दिवस की सुनियोजित ढंग से की जा रही मिटटी पलीत का नतीजा था कि जहां पहले डीएम की अध्यक्षता वाले दिन दो सैंकड़ा से ऊपर फरियादी आते थे वहीं अब इनकी संख्या 100 से नीचे सिमट गई। राठौरन पुरवा के मानसिंह पुत्र दुलारे ने डीएम के मुंह पर अपने क्षेत्र के कानूनगो शिवम राठौर और लेखपाल हरदास के खिलाफ शिकायत की कि वे उसकी न्यायोचित समस्या के समाधान के लिए रुपये मांग रहे हैं। तिलमिलाए डीएम ने इस पर तहसीलदार से कहा कि वे जांच करें। अगर आरोप सही है तो कानूनगो और लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की जाये अन्यथा फरियादी के खिलाफ। डीएम के इस तेवर से मानसिंह ही नही कई अन्य फरियादी भी सहम गये। कई तो इसके कारण बिना शिकायत दिये उल्टे पैरों लौट गये।
उधर जायघा की प्रधान मंजू देवी पत्नी चंद्रपाल सिंह ने उप जिलाधिकारी के दुस्साहसिक रवैये की शिकायत की। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के तालाब पर जिन लोगों ने कब्जा कर रखा था उनके विरुद्ध उन्होंने प्रधान होने के नाते रिपोर्ट दे दी। जिसके फलस्वरूप 10 फरवरी को उपजिलाधिकारी सौजन्य कुमार को कब्जा खाली कराने की औपचारिकता के लिए आना पड़ा। लेकिन इसके बाद उनके और उनके पति के खिलाफ शांति भंग की आशंका की कार्रवाई कर दी गई जिसमें उन्हें जमानत करानी पड़ी। इतना ही नही उप जिलाधिकारी ने उनसे सामने कहा कि अगर कब्जे के मामले में ज्यादा पीछे पड़े तो उत्पीड़न एक्ट का मुकदमा लिखवाकर जेल भिजवा देगें। प्रधान के इस आर्दनांद से उपस्थित लोग हक्के-बक्के रह गये। कई प्रधान यह चर्चा करते सुने गये कि वे यहां से सबक लेके जायेगें। कब्जा हटवाने के चक्कर में न पड़ने की कसम उन लोगों को खानी पड़ेगी।
अन्य शिकायतों के मामले में भी अधिकारियों की अन्यमनस्कता देखी गई। लोगों ने चर्चा की कि बंगरा-माधौगढ़ रोड का जब सुदृढ़ीकरण किया गया था तब इससे जुड़े संपर्क मार्ग नीचे रह जाने से हादसे बढ़ गये थे। यही स्थिति अब बनी माधौगढ़-कमसेरा सड़क पर हो गई है। इसलिए लोगों को अकाल मृत्यु से बचाना है तो रैंप बनाकर सड़क से संपर्क मार्ग पर आने-जाने की व्यवस्था को सुगम बनाया जाये। लेकिन लोक निर्माण विभाग के अभियंता ने बजट की कमी बताकर इससे पल्ला झाड़ लिया।






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